गुमल से जगरनाथ पासवान की रिपोर्ट
गुमला. गुमला जिले में खरीफ फसलों की 85 फीसदी खेती पूरी हो चुकी है. मानसून आगमन के बाद शुरूआती दौर में अपेक्षित बारिश के अभाव में जिले भर के किसानों में मायुसी छायी रही. बीज दुकानों में किसानों की भीड़ उमड़ी और जमकर विभिन्न कंपनियों के एक, दो एवं तीन नंबर खेत के लिए जिले की प्रमुख फसल धान सहित मोटे अनाजों, दलहन व तेलहन बीजों की खरीदारी हुई. लेकिन अपर्याप्त बारिश के कारण बीजों की बुआई के लिए किसानों को काफी इंतजार करना पड़ा.
जैसे-जैसे जिन-जिन क्षेत्रों में बारिश होते गयी, वैसे-वैसे बीजों की बुआई की गयी. कृषि कार्यालय गुमला के रिपोर्ट के अनुसार गत माह 30 जुलाई तक मात्र 34 फीसद ही खरीफ फसलों की खेती की जा सकी थी. लेकिन जुलाई माह खत्म होने के बाद अगस्त माह में महज 20 दिनों में ही 228.8 मिमी बारिश हुई. जिसका किसानों ने पूरा-पूरा लाभ उठाया. अगस्त माह में खेती के काम तेजी आयी. 20 अगस्त तक जिले भर में कुल 85 फीसदी खरीफ फसलों की खेती की गयी. जिसमें धान के आच्छादन के निर्धारित लक्ष्य 1.88 लाख हेक्टेयर के विरूद्ध 167,972 (89 प्रतिशत) हेक्टेयर भूमि पर खेती की गयी है.
जिसमें छींटा विधि से 44675 हेक्टेयर व रोपा विधि से 123,297 हेक्टेयर भूमि पर खेती की गयी है. चूंकि धान जिले की प्रमुख और बहुतायात में उत्पादित की जाने वाली फसल है. इसकी खेती लगभग पूरी हो जाने से किसानों में खुशी है. वहीं खरीफ के अन्य फसल मक्का 8100 हेक्टेयर के विरूद्ध 6712 हेक्टेयर, मड़ुआ 10 हेक्टेयर के विरूद्ध 8255 हेक्टेयर, अरहर 16 हजार हेक्टेयर के विरूद्ध 11087 हेक्टेयर, उरद 8 हजार हेक्टेयर के विरूद्ध 6878 हेक्टेयर, मूंग 1500 हेक्टेयर के विरूद्ध 1187 हेक्टेयर, अन्य दलहन 2200 हेक्टेयर के विरूद्ध 166 हेक्टेयर, मूंगफली 6500 हेक्टेयर के विरूद्ध 5699 हेक्टेयर, तिल 100 हेक्टेयर के विरूद्ध 20 हेक्टेयर व सरगुजा 1500 हेक्टेयर के विरूद्ध 38 हेक्टेयर भूमि पर खेती पूरी की गयी है.
उर्वरक की कालाबाजारी पर नजर रखने की आवश्यकता
खरीफ फसलों की खेती के बाद अब किसानों को उर्वरक की आश्यकता है, ताकि किसान उर्वरक को फसलों को बचाने के लिए उपयोग कर सके. लेकिन उर्वरक की खरीद में कई जगहों पर किसान ठगे जा रहे हैं. किसानों से उर्वरक का सरकार द्वारा निर्धारित दर से भी अधिक कीमत लिया जा रहा है. इसका ताजा उदाहरण घाघरा प्रखंड है. जहां उर्वरकों की कालाबाजारी रोकने व किसानों को तय मूल्य पर उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए गत दिनों आंदोलन तक किया गया. ऐसे उर्वरकों की कालाबाजारी के मामले में गुमला पहले नंबर है. गुमला में उर्वरकों की कालाबाजारी के मामले में कई बड़ी कार्रवाईयां की जा चुकी है. लेकिन यहां हर साल खरीफ मौसम में उर्वरकों की कालाबाजारी आम रही है. प्रशासन को इसपर ध्यान रखने की आवश्यकता है, ताकि किसानों को ठगी व अधिक आर्थिक बोझ से बचाया जा सके.
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