दुर्जय पासवान, गुमला गुमला नगर परिषद में सामग्री खरीद और कबाड़ बेचने का मामला अब बड़ा विवाद बन गया है. हाल ही में हुई बैठक में कार्यपालक पदाधिकारी (ईओ) मनीष कुमार और पार्षदों के बीच तीखी बहस हुई. पार्षदों का आरोप है कि सामग्री खरीद का जिम्मा ईओ का था, लेकिन बाजार में पार्षदों पर कमीशन लेने की अफवाह फैलायी जा रही है. उन्होंने इसे बदनाम करने की साजिश बताया और कहा कि जांच से ही सच्चाई सामने आयेगी.
सामग्री खरीद में किसी प्रकार का घोटाला नहीं हुआ है.
ईओ मनीष कुमार ने पार्षदों के सामने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि मीडिया में खबर कैसे आयी, उन्हें जानकारी नहीं है. उन्होंने पार्षदों से संचिका की जांच करने को कहा और दावा किया कि सामग्री खरीद में किसी प्रकार का घोटाला नहीं हुआ है. नगर परिषद के उपाध्यक्ष ने भी कहा कि सभी खरीद की जांच होनी चाहिए ताकि पारदर्शिता बनी रहे.आरोपों की जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके.
वार्ड पार्षद मनीष हिंदुस्तान ने स्पष्ट किया कि सामग्री खरीद में किसी भी पार्षद की भूमिका नहीं रही है और न ही किसी ने कमीशन लिया है. उन्होंने कहा कि पार्षद दिलीप भगत द्वारा लगाये गये घोटाले के आरोपों की जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके.सरकारी संपत्ति बेचने का मामला भी गरमा गया
इधर, सरकारी संपत्ति बेचने का मामला भी गरमा गया है. कबाड़ हो चुकी संपत्ति लाखों रुपये में कबाड़ी दुकान को बेच दी गयी. पार्षद दिलीप कुमार भगत ने धरना देकर आरोप लगाया कि बिना बोर्ड की अनुमति संपत्ति बेचना चोरी जैसा है. उन्होंने सवाल उठाया कि बेची गयी संपत्ति का पैसा कहां गया और अनुमति किसने दी. पार्षद केके मिश्रा ने भी इस मामले को गंभीर बताते हुए जांच की मांग की.