पेसा नियमावली का अनुपालन हर हाल में सुनिश्चित करें : उपायुक्त

पेसा नियमावली का अनुपालन हर हाल में सुनिश्चित करें : उपायुक्त

प्रतिनिधि, गुमला

गुमला नगर भवन में शुक्रवार को आयोजित जिला स्तरीय राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस में पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों का विस्तार) झारखंड नियमावली 2025 पर विस्तार से चर्चा हुई. कार्यक्रम का उद्घाटन उपायुक्त दिलेश्वर महत्तो, पुलिस अधीक्षक हारिस बिन जमां, प्रमंडल पदाधिकारी अहमद बेलाल अनवर, डीडीसी अनिमेष रंजन, एसी राजीव नीरज, जिला पंचायत राज पदाधिकारी डॉ. शिशिर कुमार सिंह तथा जिला परिषद उपाध्यक्ष संयुक्ता देवी ने किया.

पेसा नियमावली पूरी तरह लागू हो चुकी है

उपायुक्त ने कहा कि राज्य में पेसा नियमावली पूरी तरह लागू हो चुकी है और इसके सभी प्रावधानों का पालन अनिवार्य है. उन्होंने स्पष्ट किया कि इस नियमावली का मुख्य उद्देश्य परंपरागत ग्राम सभा और पंचायती राज स्वशासन व्यवस्था को सुदृढ़ करना है. छोटानागपुर और संथाल जैसे क्षेत्रों में परंपरा के अनुसार ग्राम प्रधानों को अलग-अलग नामों से जाना जाता है—जैसे मुंडा-मानकी, भूमिज या हो समाज. अब इन्हीं के द्वारा ग्राम सभाओं का संचालन किया जायेगा. उपायुक्त ने निर्देश दिया कि जहां पद रिक्त हैं, वहां परंपरागत रीति-रिवाजों के अनुसार वंशजों का चयन कर पदों को शीघ्र भरा जाये.

उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि जिले के विभिन्न विभागों के पदाधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी और अभियंतागण पेसा नियमावली को गहराई से पढ़ें और समझें. अनुसूचित क्षेत्रों के ग्रामों में आगे जो भी कार्य होंगे, उनमें नियमावली का अनुपालन हर हाल में सुनिश्चित होना चाहिए. इससे ग्राम सभाएं मजबूत होंगी और योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता तथा सहूलियत बढ़ेगी.

कार्यक्रम में पंचायती राज विभाग से आए पेसा राज्य समन्वयक शैलेंद्र कुमार ने नियमावली की पृष्ठभूमि और इसके अस्तित्व में आने की परिस्थितियों पर प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि यह कानून अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को सशक्त बनाने और समुदाय आधारित निर्णय प्रक्रिया को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया है.

स्थानीय स्वशासन को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण साधन है

जिला पंचायत राज पदाधिकारी डॉ. शिशिर कुमार सिंह ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया और कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पेसा नियमावली अनुसूचित क्षेत्रों में स्थानीय स्वशासन को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण साधन है. यह ग्राम सभाओं को अधिकार प्रदान कर उन्हें योजनाओं के क्रियान्वयन में सक्रिय भागीदारी के लिए सक्षम बनाती है.

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Author: Akarsh Aniket

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