कहीं भवन जर्जर तो कहीं अधूरा निर्माण, जान जोखिम में डाल पढ़ रहे बच्चे, विभाग से गुहार के बावजूद नहीं सुधरे हालात

गुमला के पालकोट में स्कूलों की स्थिति बेहद खराब है। जर्जर भवन और शिक्षकों की कमी के कारण बच्चे जान जोखिम में डालकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं।

गुमला: पालकोट प्रखंड की टेंगरिया और बागेसेरा पंचायत में शिक्षा व्यवस्था बदहाल नजर आ रही है. शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले कई विद्यालय जर्जर भवन, अधूरे निर्माण और शिक्षकों की कमी जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं. ऐसे में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है. टेंगरिया पंचायत के नव प्राथमिक विद्यालय, करंजटोली का भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है.

भवन की खस्ताहाल स्थिति के कारण विद्यालय पिछले एक वर्ष से गांव के ही सवना बिलुंग के मकान में दो कमरों का किराया देकर संचालित किया जा रहा है. यहां पारा शिक्षिका पुष्पा कुमारी किसी तरह 35 बच्चों को पढ़ा रही हैं. पुष्पा कुमारी ने बताया कि गर्मी और ठंड के मौसम में किसी तरह काम चल जाता है, लेकिन बरसात में परेशानी होती है.

विद्यालय में रसोईघर तक नहीं है, जिससे मध्याह्न भोजन दूसरी जगह तैयार कर लाना पड़ता है. पुराने भवन की छत से पानी टपकता है, इसलिए कमरे के अंदर प्लास्टिक बांधकर किसी तरह व्यवस्था की गयी है. संकुल सेवी शारदा प्रसाद ने बताया कि विद्यालय भवन की समस्या को लेकर कई बार बीआरसी कार्यालय, पालकोट में आवेदन दिया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है.

वहीं टेंगरिया खास राजकीय उत्क्रमित उवि में भी स्थिति संतोषजनक नहीं है. विद्यालय परिसर में लाखों रुपये की लागत से दो कमरों का नया भवन बन रहा है, लेकिन निर्माण कार्य अब तक अधूरा है. शिक्षक चंदन कुमार ने बताया कि प्रधानाध्यापक अमित प्रफुल्ल मिंज बीआरसी के कार्य से बाहर गये हैं.

नये भवन के निर्माण की प्रगति के संबंध में शिक्षा विभाग के कनीय अभियंता (जेई) से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका मोबाइल बंद मिला. इधर, बागेसेरा पंचायत के राजकीय उत्क्रमित उवि मलई की स्थिति भी चिंताजनक है. यहां 190 विद्यार्थियों की पढ़ाई के लिए केवल चार शिक्षक कार्यरत हैं.

विद्यालय का भवन अत्यंत जर्जर होने के बावजूद बच्चे जान जोखिम में डाल कर पढ़ाई करने को मजबूर हैं. विद्यालय की प्रधानाध्यापिका प्रतिमा नाग ने बताया कि भवन की स्थिति बेहद दयनीय है. साथ ही विद्यालय में शिक्षकों की भारी कमी है. उन्होंने विभाग से नये शिक्षकों की नियुक्ति और भवन की समस्या के शीघ्र समाधान की मांग की है.


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By दुर्जय पासवान

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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