हर साल करोड़ों का खर्च, फिर भी डीएसपी रोड बदहाल! नगर परिषद के कामकाज पर उठे सवाल

गुमला शहर में हर साल विकास के नाम पर करोड़ों खर्च होते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत बेहद चिंताजनक है. नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए लोगों ने विशेष ऑडिट की मांग की है.

गुमला. गुमला शहर के विकास में हर साल करोड़ों रुपये खर्च होते हैं. लेकिन शहर की जमीनी हकीकत किसी से छिपी हुई नहीं है. जनता जानती है कि कहां क्या हो रहा है, किसे लाभ मिल रहा है और कौन ठगा जा रहा है. भ्रष्टाचार में लिप्त लोगों पर कार्रवाई नहीं होने के कारण जनता भी चुप रहती है. हालांकि अब धीरे-धीरे शहर के मुद्दों पर जनता मुखर होने लगी है और बड़े आंदोलन की तैयारी भी चल रही है.

नगर परिषद के मुद्दे पर अजीत विश्वकर्मा ने रखी बात

नगर परिषद कथा में झारखंड आंदोलनकारी मोरचा के जिला संरक्षक सह सामाजिक कार्यकर्ता अजीत कुमार विश्वकर्मा ने नगर परिषद के मुद्दे पर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि यदि जिले के बड़े अधिकारी उनकी बातों को गंभीरता से लेकर जांच कराते हैं, तो नगर परिषद का सच सामने आयेगा.

एक कमरे से शुरू हुआ था नगरपालिका का कार्यालय

अजीत कुमार विश्वकर्मा ने कहा कि नगर परिषद गुमला के गठन से पहले गुमला नगरपालिका का कार्यालय मात्र एक कमरे में शुरू किया गया था. जिला बनने के बाद उस समय के तत्कालीन उपायुक्त एएनपी सिन्हा के प्रयास से मुख्यमंत्री स्वर्गीय बिंदेश्वरी दूबे द्वारा एक करोड़ रुपये मुहैया कराया गया.

उस समय नगरपालिका के 10 वार्ड में बोल्डरयुक्त सड़क थी. उस बोल्डरयुक्त सड़क को बनवाने का कार्य तीन विभागों को दिया गया. इसके बाद सड़क बनी. उन्होंने कहा कि इसके बाद भी काफी पैसा बचा रह गया.

करोड़ों के आवंटन के बावजूद सड़क-नाली पर सवाल

अजीत कुमार विश्वकर्मा ने कहा कि वर्तमान में गुमला नगर परिषद को करोड़ों रुपये का आवंटन मिलता है. इसके बावजूद यहां खरीद-बिक्री और रोड-नाली का कुछ पता नहीं चलता है.

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि डीएसपी रोड में पिछले 10 सालों से सांसद और विधायक फंड के साथ नगर परिषद की ओर से भी करोड़ों रुपये खर्च किये गये हैं. इसके बावजूद डीएसपी रोड चलने लायक नहीं है और सड़क काफी खराब है.

उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन ने भी इसी रोड को बनाने के लिए 1.50 करोड़ रुपये दिया है.

संसाधनों की खरीद का विशेष ऑडिट कराने की मांग

अजीत कुमार विश्वकर्मा ने मांग की है कि नगर परिषद के संसाधनों की खरीद का विशेष ऑडिट कराया जाना चाहिए और श्वेत पत्र जारी होना चाहिए, ताकि जनता को खर्च की जानकारी मिल सके.

बस स्टैंड से करोड़ों का राजस्व, सुविधाएं नगण्य

उन्होंने कहा कि वर्तमान में बस स्टैंड से करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होता है. लेकिन वहां रोड सहित अन्य सुविधाएं नगण्य हैं.

उन्होंने कहा कि नवनिर्वाचित बोर्ड से जनता को काफी अपेक्षाएं हैं. लेकिन ये लोग खरा नहीं उतर पा रहे हैं.

पीएम आवास और सफाई व्यवस्था पर भी सवाल

अजीत कुमार विश्वकर्मा ने कहा कि पीएम आवास का पैसा ऊपरी तल्ले में खर्च हो जा रहा है. इसकी जांच होनी चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि त्योहारों के समय साफ-सफाई की व्यवस्था भी संतोषप्रद नहीं होती है.

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लेखक के बारे में

By दुर्जय पासवान

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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