सिसई. सिसई प्रखंड में बरसात के शुरुआत दिनों से लगातार हो रही अतिवृष्टि ने किसानों की कमर तोड़ दी है. औसत से अधिक दिन-रात बारिश होने से टांड़ गीला हो गया है. टांड़ों से पानी रिसाव हो रहा है, जिससे किसानों को खेत जोतने तक का मौका नहीं मिल रहा है. टांड़ का टांड़ खाली पड़ा है. अतिवृष्टि से मक्का, मटर, उड़द, अरहर, बादाम व सब्जी जैसी खरीफ फसलें पूरी तरह प्रभावित हो गयी हैं. कई किसानों ने हिम्मत कर मक्का, सब्जी की खेत करने का प्रयास किया. परंतु या तो उनका बिचड़े खराब हो गये या तो खेत में बुआई की गयी फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गयी. महिला किसान मंजू उरांव ने कहा कि अतिवृष्टि से इस साल किसानों की आर्थिक स्थिति और कमजोर हो जायेगी. खरीफ फसल में किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है. यदि समय पर मदद नहीं मिली, तो आगामी रबी सीजन में वे खेती करने की स्थिति में भी नहीं रहेंगे. अतिवृष्टि ने न केवल किसानों की आय पर बल्कि रोजगार व उनके परिवार के समक्ष जीवन-यापन पर भी संकट खड़ा कर दिया है. मंजू ने कहा कि अतिवृष्टि से पहली बार उसने किसानों को मक्का, मटर जैसे बीजों को दुकानदारों को वापस करते देखा है. उसने भी डेढ़ क्विंटल मक्का बीज व एक क्विंटल मटर बीज वापस कर दी.
बीज वापस कर रहे हैं किसान : दुकानदार
उत्तम कृषि भंडार के संचालक धनीराम यादव ने कहा कि इस बार खरीफ फसल की बीज की बिक्री नहीं के बराबर है. प्रखंड क्षेत्र में 30 से 35 टन मक्का बीज, करीब 25 से 30 टन मटर के बीज की खपत होती है. किंतु बीज बिके ही नहीं, जो बिके थे, वह भी वापस आ गये. इस तरह अब तक बाजार में करीब 20 टन आलू बीज बिक जाता था.आलू बीज भी नहीं बिक रहा है. यही स्थिति रही तो रबी फसल प्रभावित होगी.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
