गुमला में पारंपरिक वेशभूषा में बच्चों ने बिखेरी आदिवासी संस्कृति की छटा

गुमला के ज्ञान निकेतन में विश्व आदिवासी दिवस पर बच्चों ने पारंपरिक वेशभूषा में लोकगीत और नृत्य प्रस्तुत कर अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की झलक दिखाई.

गुमला: जिले के बिशुनपुर विकास भारती द्वारा संचालित ज्ञान निकेतन में विश्व आदिवासी दिवस समारोह का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में विभिन्न जनजातियों की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और लोककला की आकर्षक झलक देखने को मिली. बच्चों ने पारंपरिक वेशभूषा में लोकगीत एवं नृत्य प्रस्तुत कर लोगों का मन मोह लिया.

मुख्य आकर्षण का केंद्र रहा लोकनृत्य और लोकगीत

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण असुर जनजाति का लोकनृत्य, खेरवार जनजाति का जादूर नृत्य, उरांव एवं बिरजिया जनजातियों का पारंपरिक नृत्य रहा. बच्चों ने अपनी-अपनी जनजातीय वेशभूषा धारण कर गीत और नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी. उनकी प्रस्तुति पर कार्यक्रम स्थल तालियों से गूंज उठा. मौके पर संस्था के संयुक्त सचिव महेंद्र भगत ने कहा कि आदिवासी समाज की पहचान उसकी भाषा, संस्कृति, परंपरा और पारंपरिक पहनावे से है.

सांस्कृतिक विरासत को बचाये रखना सभी की जिम्मेदारी

आधुनिकता के दौर में अपनी सांस्कृतिक विरासत को बचाये रखना सभी की जिम्मेदारी है. बच्चों को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ना जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ी भी अपनी जड़ों और विरासत को समझ सके. उन्होंने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस संस्कृति के संरक्षण और नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ने का अवसर है. मौके पर कुमकुम मैत्रा, पुनीता कुमारी, प्रतिमा कुमारी, विमला देवी, भगवती देवी, रतन उरांव, दयाली सिंह खेरवार, आर्यन उरांव सहित कई लोग उपस्थित थे.

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By दुर्जय पासवान

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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