गुमला से दुर्जय पासवान की रिपोर्ट
Bharatmala Project Gumla, गुमला : भारतमाला सड़क परियोजना के तहत चल रहे निर्माण कार्य में विवाद अब बेहद गहरा गया है. सोमवार को गुमला में बकाया मजदूरी न मिलने से नाराज ग्रामीणों और नाइट गार्डों का गुस्सा फूट पड़ा. उग्र मजदूरों ने सड़क बना रही ‘शिवालया कंस्ट्रक्शन कंपनी’ के अस्थायी कार्यालय में जमकर बवाल काटा. इस दौरान मजदूरों ने कंपनी के एचआर (HR) का कॉलर पकड़ लिया, उन्हें दफ्तर से घसीटकर बाहर निकाला और उनकी पिटाई कर दी. बीच-बचाव करने आए एक अन्य कर्मचारी के साथ भी मजदूरों की तीखी हाथापाई हुई. घटना के बाद निर्माण स्थल पर भारी तनाव का माहौल है.
मजदूरी मांगने पर अभद्र व्यवहार करने का आरोप
हंगामे और मारपीट की मुख्य वजह महीनों से लंबित मजदूरी का भुगतान न होना है. कंपनी के अस्थायी कैंप में नाइट गार्ड की ड्यूटी करने वाले स्थानीय मजदूरों को लंबे समय से उनका मेहनताना नहीं मिला है. मजदूरों का गंभीर आरोप है कि जब भी वे एचआर से अपनी गाढ़ी कमाई के पैसे मांगते थे, तो वह ‘आज-कल’ कहकर बात को टाल देता था. सोमवार को जब सभी मजदूर एकजुट होकर अंतिम बार अपना बकाया मांगने पहुंचे, तो एचआर ने उनके साथ अभद्र व्यवहार और गाली-गलौज की. इस बदसलूकी के बाद मजदूरों का धैर्य टूट गया और मामला हिंसक झड़प में बदल गया. दूसरी तरफ, पीड़ित एचआर का कहना है कि जैसे ही मुख्य कंपनी से फंड प्राप्त होगा, सभी मजदूरों के बकाए का तुरंत भुगतान कर दिया जाएगा.
जमीन मुआवजे से लेकर पहले से गहराया है विवाद
भारतमाला सड़क परियोजना की शुरुआत से ही यहां लगातार गतिरोध बना हुआ है. यह परियोजना विवादों का केंद्र बन चुकी है. जमीन के बदले उचित मुआवजा न मिलने को लेकर रैयतों का विरोध प्रदर्शन महीनों से जारी है. साथ ही सड़क के एलाइनमेंट में एक धार्मिक स्थल के आने से भी स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है. इसके अलावा वे गांधीवादी विचारधारा पर चलने वाले टाना भगत अपनी पुश्तैनी जमीन को बचाने के लिए लंबे समय से आंदोलनरत हैं. वे अपनी मांगों को लेकर जिला उपायुक्त (DC) कार्यालय का घेराव तक कर चुके हैं. अब शिवालया कंपनी द्वारा मजदूरों का शोषण किए जाने और समय पर भुगतान न करने से ग्रामीण पूरी तरह भड़क गए हैं.
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मजदूरों ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीण गंगा सिंह ने बताया कि वे सभी ‘भूमि सिक्योरिटी मैनेजमेंट कंपनी’ के माध्यम से इस भारतमाला परियोजना में नाइट गार्ड के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे. काम पूरा होने के बावजूद कंपनी प्रबंधन उनका पैसा दबाकर बैठा है. आक्रोशित ग्रामीणों और नाइट गार्डों ने कंपनी प्रबंधन को कड़े लहजे में चेतावनी दी है कि यदि अगले कुछ दिनों के भीतर उनके एक-एक दिन का पूरा मेहनताना नहीं चुकाया गया, तो वे काम पूरी तरह ठप कर आंदोलन को और उग्र करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शिवालया कंपनी और स्थानीय प्रशासन की होगी. मजदूरों ने अपने बकाए दिनों का विवरण इस प्रकार जारी किया है.
किन किन लोगों को नहीं हुआ है भुगतान
विराज सिंह का 20 दिन, पंकज पांडेय का 23 दिन, महादेव महतो का 21 दिन, सूरज सिंह का 58 दिन, गणेश सिंह का 34 दिन, प्रीतम कुमार का 28 दिन, गंगा सिंह का 54 दिन, रामकुमार गुप्ता का 53 दिन, लुईस मिंज का 52 दिन तथा अमर सिंह का 20 दिन का भुगतान अब तक नहीं किया गया है.
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