मंदिर परिसर में बाजार को लेकर ग्रामीणों का बड़ा फैसला, अब नहीं बिकेगा मांस-मछली

पालकोट के बंगरू गांव में ग्रामीणों ने बैठक कर गांव को नशामुक्त बनाने का निर्णय लिया है. साथ ही मंदिर परिसर में मांस-मछली की बिक्री पर रोक लगाने की अपील की गई.

पालकोट. पालकोट प्रखंड के बंगरू गांव स्थित देवी मंदिर प्रांगण में गांव के ग्रामीणों की बैठक वार्ड सदस्य शत्रुध्न महली की अध्यक्षता में हुई. बैठक में ग्रामीणों के साथ बंगरू पंचायत के जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे. बैठक में पूरे गांव को नशामुक्त गांव बनाने का निर्णय लिया गया.

इसके साथ ही प्रत्येक शनिवार को गांव के मंदिर प्रांगण में लगने वाले साप्ताहिक बाजार में सड़क किनारे मांस-मछली का बिक्री नहीं करने की अपील की गयी. वक्ताओं ने कहा कि विगत कुछ माह से देवी मंदिर प्रांगण में साप्ताहिक बाजार लग रहा है. मंदिर होने के कारण मांस-मछली बिक्री करना उचित नहीं है. प्रखंड प्रमुख सोनी लकड़ा ने नशा नाश का जड़ है.

नशा का सेवन से पूरे परिवार के साथ समाज में भी किसी प्रकार का मान-सम्मान नहीं मिलता है. इसके लत से गांवों में अराजकता फैलती है. इसलिए गांव को नशामुक्त गांव बनाने के लिए ढृढ़ संकल्प लेते हुए नशापान को त्याग करें और बच्चों की शिक्षा-दीक्षा पर विशेष रूप से ध्यान दें.

बैठक में पंचायत की मुखिया पूनम एक्का, वार्ड सदस्य संजय चीक बड़ाईक, समाजसेवी सुशील लकड़ा, कृष्णा महली, धौडा महली, पप्पू महली, रंजन महली, लालदेव लोहरा, जितेंद्र बड़ाईक, अमित महली, समरू महली, अनिश महली, सुरेश राम, अनिल राम, रवि महली, प्रताप सोरेंग, बिनीत खड़िया, सुधीर सोरेंग, बिरसा खड़िया, अजय लोहरा, सोमरा खड़िया, बसंत खड़िया समेत सैकड़ों के संख्या में महिला-पुरुष मौजूद थे.

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By दुर्जय पासवान

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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