बच्चों को बताया- फर्जी लिंक और लॉटरी मैसेज पर न करें क्लिक, सोशल मीडिया पर अजनबियों से रहें सावधान

बसिया पुलिस ने बच्चों को सुरक्षित और जागरूक बनाने के लिए 'पुलिस की पाठशाला' अभियान चलाया. बच्चों को साइबर सुरक्षा, पॉक्सो, नशापान और अंधविश्वास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी दी गई.

बसिया. पुलिस प्रशासन की ओर से स्कूली बच्चों को सुरक्षित और जागरूक बनाने के लिए पुलिस की पाठशाला अभियान के तहत मंगलवार को उच्च विद्यालय कुम्हारी में कार्यक्रम आयोजित किया गया. इसमें एसडीपीओ बसिया शिवशंकर मरांडी ने छात्र-छात्राओं की कक्षा ली और उन्हें साइबर सुरक्षा, पॉक्सो, डायन प्रथा, महिला सुरक्षा, नशापान, अंधविश्वास, मानव व्यापार और आधारभूत नैतिक शिक्षा समेत विभिन्न विषयों की जानकारी दी.

इंटरनेट के दौर में सावधानी जरूरी

एसडीपीओ ने वर्तमान समय में प्रासंगिक सामाजिक और डिजिटल सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने बच्चों को जागरूक नागरिक बनने की सीख देते हुए कहा कि इंटरनेट और सोशल मीडिया के दौर में सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है.

उन्होंने कहा कि किसी भी अनजान लिंक, फर्जी लॉटरी मैसेज या नौकरी के लुभावने विज्ञापन पर क्लिक नहीं करना चाहिए. फर्जी लिंक और आकर्षक ऑफर के जरिए साइबर ठगी हो सकती है.

ओटीपी और बैंक की जानकारी साझा न करें

एसडीपीओ ने बच्चों को बताया कि ओटीपी, पासवर्ड, बैंक से जुड़े विवरण, एटीएम पिन या ओटीपी माता-पिता की अनुमति के बिना किसी के साथ साझा नहीं करना चाहिए. सोशल मीडिया पर अजनबियों की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार करने से भी बचना चाहिए.

उन्होंने बच्चों को अपनी निजी तस्वीरें और व्यक्तिगत जानकारी सोशल मीडिया पर पोस्ट नहीं करने की सलाह दी. साथ ही किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी अभिभावकों या संबंधित अधिकारियों को देने की बात कही.

ये रहे मौजूद

मौके पर एचएम मेरी ग्रेस इंदवार, प्रकाश बड़ाईक, सुनीता कुमारी, जॉन नितेश कुमार, दीपक कुमार लकड़ा, माइकेल इंदवार, सुनील इंदवार, घनश्याम उरांव, महाबीर साहू सहित अन्य मौजूद थे.

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By दुर्जय पासवान

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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