वर्ष 2016 में मैट्रिक व इंटर की परीक्षा में कदाचार का मामला प्रकाश में आया था. इसमें कई स्कूल शामिल हैं. एसडीओ ने जांच रिपोर्ट तैयार कर डीसी को सौंपी थी. कार्रवाई नहीं होने पर नागरिक आयोग के शंभु सिंह की शिकायत के बाद जैक ने डीसी को पत्र लिख कर कार्रवाई का निर्देश दिया है.
दुर्जय पासवान
गुमला : वर्ष 2016 में मैट्रिक व इंटर की परीक्षा में कदाचार व फरजीवाड़ा के मामले में झारखंड अधिविध परिषद रांची (जैक) के सचिव ने गुमला के डीसी श्रवण साय को कार्रवाई करने का निर्देश दिया है.
इस संबंध में जैक सचिव ने डीसी को पत्र लिखा है. जिसमें सचिव ने कहा है कि राष्ट्रीय मुद्दों के लिए नागरिक आयोग के शंभुनाथ सिंह द्वारा परिवाद पत्र परिषद को उपलब्ध कराया गया है, जिसमें वर्ष 2016 की परीक्षा में कदाचार की गयी है. इसमें कदाचार कर विद्यार्थियों को पास कराने के लिए पैसों का लेनदेन बड़े पैमाने पर हुआ है. सचिव ने डीसी को कहा है कि उक्त परिवाद एवं जांच प्रतिवेदन के आलोक में संबंधितों पर यथोचित कार्रवाई करें.
एसडीओ की जांच से मामला उजागर
वर्ष 2016 की परीक्षा में कदाचार व विद्यार्थियों से मोटी रकम वसूल कर परीक्षा पास कराने का मामला उजागर होने के बाद डीसी के निर्देश पर एसडीओ केके राजहंस ने जांच की थी.
उस समय एसडीओ ने दो जांच रिपोर्ट डीसी को सौंपी थी. पहली जांच रिपोर्ट 23 फरवरी 2016 को सौंपी थी. जिसमें प्राथमिक जांच में 12 केंद्राधीक्षक, सहायक केंद्राधीक्षक व शिक्षकों को कदाचार में संलिप्त पाया गया था. उनके विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करते हुए विभागीय कार्यवाही करने की अनुशंसा की गयी थी. इसमें जिला शिक्षा पदाधिकारी गुमला को भी दोषी ठहराया गया था. एसडीओ ने दूसरा जांच प्रतिवेदन 10 मार्च 2016 को डीसी को सौंपा, जिसमें उन्होंने पंपापुर इंटर कॉलेज पालकोट, जेबीआर पब्लिक स्कूल करौंदी, एसएस बालक हाई स्कूल गुमला, जय किसान उवि रायडीह, संत पात्रिक स्कूल गुमला व डीइओ के अलावा संबंधित स्कूल के प्राचार्य के विरुद्ध कार्रवाई करने की अनुशंसा की थी.
निगरानी विभाग से नहीं हुई जांच
मामला गंभीर होने के कारण एसडीओ ने उस समय अपने जांच प्रतिवेदन में कहा था कि इंटर की परीक्षा में एक षडयंत्र के तहत अनुचित तरीके के प्रयोग में सक्रिय शिक्षा माफिया, सरकारी, फरजी विद्यालय प्रबंधन एवं जिला के शिक्षा विभाग के अधिकारी, कर्मचारी की संलिप्तता है. जिसकी विस्तृत जांच की आवश्यकता है. इस पूरे षडयंत्र की जांच निगरानी से करायी जाये. एसडीओ ने उस समय जांच रिपोर्ट में दिये गये लोगों के कार्यकलाप व आय से अधिक संपत्ति की भी जांच करने की अनुशंसा कर चुके हैं. इसके बावजूद अभी तक मामला लंबित है.
सचिव व एसीबी से भी की शिकायत
एसडीओ की जांच रिपोर्ट के बाद कार्रवाई नहीं होने के बाद नागरिक आयोग के शंभुनाथ सिंह ने जैक, सचिव व एसीबी को पत्र लिख कर पूरे मामले की जानकारी दी है. सबसे पहले श्री सिंह ने सूचना के अधिकारी से एसडीओ की जांच रिपोर्ट प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने राज्य के वरीय अधिकारियों को पत्र लिख कर मामले की निष्पक्ष जांच करते हुए कार्रवाई की मांग की. श्री सिंह के पत्र के आलोक में जैक ने डीसी को कार्रवाई करने का निर्देश दिया है.
हाई प्रोफाइल लोगों को बचाने का खेल
मामला हाई प्रोफाइल होने व इसमें कई नामीगिरामी का नाम शामिल होने के कारण मामले को दबाने का पूरा प्रयास हुआ है. इसलिए मामला एक साल से लंबित पड़ा हुआ है और अभी तक किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है. हालांकि गुमला डीसी श्रवण साय का बार-बार बयान आया है कि वे जांच रिपोर्ट को वरीय अधिकारियों के पास कार्रवाई के लिए भेजा है. जैसे ही मार्गदर्शन मिलेगा कार्रवाई होगी.
40 हजार से एक लाख तक की वसूली
जांच रिपोर्ट से खुलासा हुआ है. विद्यार्थियों को अच्छे अंक से पास कराने के लिए प्रत्येक छात्र से 40 हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक की वसूली की जाती रही है. वर्ष 2016 में जब मामला उजागर हुआ, तो एसडीओ केके राजहंस ने 32 विद्यार्थियों से पूछताछ की थी. उस समय मामला सामने आया था कि परीक्षा में अच्छे अंक से पास कराने के नाम पर मोटी रकम ली जाती है.
एसडीओ की जांच रिपोर्ट के समय ही कार्यवाही होनी चाहिए थी, लेकिन मामला दब गया. अब जब जैक के सचिव का आदेश आया है, तो सवाल उठ रहा है कि आखिर कार्यवाही में इतना विलंब क्यों. गुमला में हावी शिक्षा माफिया पर अंकुश लगाने का यह अच्छा अवसर है. इसमें जो माफिया छिपे बैठे हैं, अगर कार्यवाही होती है, तो वे भी डरेंगे. अगर कार्यवाही नहीं हुई, तो फिर मनोबल बढ़ेगा और इसी प्रकार मैट्रिक व इंटर में कदाचार का खेल चलता रहेगा.
