सिसई. गुमला. धर्मांतरित आदिवासियों को आरक्षण सूची से बाहर करने यानी डिलिस्टिंग की मांग को लेकर दिल्ली में आयोजित राष्ट्रव्यापी हुंकार रैली और धरना-प्रदर्शन में शामिल होने के लिए गुमला जिले से जनजातीय समाज के 518 लोग दिल्ली रवाना हुए. आदिवासी नेता सुमेश्वर उरांव के नेतृत्व में सिसई प्रखंड से सैकड़ों लोग गगनभेदी नारों के साथ दिल्ली निकले. मौके पर सुमेश्वर उरांव ने कहा कि जनजातीय समाज को उनकी रूढ़ी-परंपरा, विशिष्ट पूजा-पद्धति व सांस्कृतिक पहचान के आधार पर संवैधानिक आरक्षण का लाभ दिया गया है. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग धर्म परिवर्तन कर मूल समाज से अलग होने के बावजूद आरक्षण का लाभ ले रहे हैं, जिससे वास्तविक लाभुकों को नुकसान हो रहा है. इसी विसंगति को दूर करने के लिए जनजातीय सुरक्षा मंच देशभर में डिलिस्टिंग आंदोलन चला रहा है. उन्होंने कहा कि मूल आदिवासी परंपराओं से दूरी बढ़ने के कारण समाज में कुरीतियां बढ़ रही हैं और सामुदायिक एकता कमजोर हो रही है. डिलिस्टिंग कानून लागू होने से जनजातीय समाज को आरक्षण का वास्तविक लाभ मिलेगा और सामाजिक संरचना मजबूत होगी. सुमेश्वर उरांव ने कहा कि जो भोलेनाथ का नहीं, वह हमारी जात का नहीं जैसे नारों के माध्यम से गांव-गांव में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है. आने वाले समय में ग्रामीण स्तर पर उपवास कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे तथा ग्राम सभाओं के माध्यम से डिलिस्टिंग के समर्थन में प्रस्ताव पारित कराये जायेंगे. उन्होंने दावा किया कि दिल्ली की हुंकार रैली में देशभर से करीब 10 लाख लोग जुटेंगे. कहा कि जब तक संसद से डिलिस्टिंग कानून लागू नहीं होता, तब तक सड़क से सदन तक आंदोलन जारी रहेगा. मौके पर सुमित महली, विश्व भूषण खड़िया, राजेश उरांव, भैरव सिंह खेरवार, जयराम उरांव, इंद्रपाल भगत, रिचर्डसन एक्का, करिंदर पहान, सुमन कुमारी, सरोज कुमारी, अशोक कुमार भगत, बालेश्वर भगत, कर्मपाल उरांव, सुरेंद्र उरांव, मनोज उरांव, चंद्रदेव उरांव, कृष्णा महली, भीखा लोहरा, अजय सिंह खेरवार, घनश्याम बड़ाइक, सुकरू खड़िया, सुरेश नगेसिया, छोटेलाल सिंह खेरवार, प्रेमी देवी, चारोमति देवी, गेदी देवी, तारकेश्वर उरांव, लालू उरांव, संदीप सिंह खेरवार, सुधीर उरांव, राजेंद्र गोप, कालेश्वर गोप, मुकेश बड़ाइक, रवींद्र महली, पंचू उरांव, चारवा उरांव आदि मौजूद थे.
डिलिस्टिंग की मांग को लेकर गुमला से 518 आदिवासी दिल्ली रवाना
मूल आदिवासी परंपराओं से दूरी बढ़ने से समाज में बढ़ रही हैं कुरीतियां : सुमेश्वर
