गुमला : गुमला में 17 सालों में ढाई गुणा दुष्कर्म की घटना बढ़ी है. यह और कोई नहीं, गुमला पुलिस की दुष्कर्म मामले में दर्ज प्राथमिकी कहती है. वर्ष 2003 में दुष्कर्म की 31 घटनाएं पुलिस रिपोर्ट में दर्ज हैं. वहीं 17 साल में दुष्कर्म की घटनाओं का ग्राफ बढ़ कर 85 हो गया. सरकार व पुलिस लाख दावा कर ले, लेकिन जो हकीकत है, उसे झुठलाया नहीं जा सकता है.
गुमला जिले में दुष्कर्म की हुई घटनाएं कुछ यहीं हकीकत बयां कर रही है. साथ ही पुलिस की खामियों व सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर रही है. पुलिस कहती है, हम सुरक्षा दे रहे हैं. बेटियां सुरक्षित हैं. बेटियां बेखौफ घूमें. खुद गुमला पुलिस भी सुरक्षा देने का वादा करती है, लेकिन पिछले 16 वर्षों की रिपोर्ट को छोड़ भी दें, तो वर्ष 2019 में 85 बहू-बेटियों से रेप की घटना घटी है.
इसमें भरनो प्रखंड में एक लव जिहाद का भी मामला शामिल है, जिसमें धर्म दूसरा बता कर युवक ने युवती को शादी का प्रलोभन देकर रेप किया था. वहीं रायडीह में एक युवती से रेप के बाद उसकी हत्या कर दी गयी थी.
घाघरा प्रखंड में एक पिता ने अपनी सौतेली बेटी को ही हवस का शिकार बनाया था. सबसे चौंकाने वाली बात कि 2019 के जनवरी में 12 दिन में दुष्कर्म की छह घटनाएं घटी थी.
यानि हर दो दिन में एक बेटी की इज्जत लूटी गयी थी. रेप की घटनाओं से गुमला की बदनामी हो रही है. पुलिस कहती है, हर जगह पुलिस की चौकसी है. गश्ती हो रही है, लेकिन नजर उठा कर देखे लें. पुलिस की गश्ती उसी समय होती है, जब कोई वीआइपी गुमला का दौरा करते हैं. ऐसे समय में कुछ जगहों तक ही पुलिस सिमट कर रही गयी है. ट्रैफिक पुलिस को सिर्फ गुमला शहर के टावर चौक व पटेल चौक पर देखा जा सकता है.
पुलिस ने शहर की सुरक्षा के लिए पुलिस बीट, तो गांवों की सुरक्षा के लिए कई स्थानों पर पुलिस पिकेट की स्थापना की है. इसके बावजूद सुरक्षा की कहीं कोई गारंटी नहीं है. अगर हम 2003 से 2019 तक 17 सालों की रेप की घटना पर नजर डालें, तो 912 रेप की घटनाओं में प्राथमिकी दर्ज की गयी है.
