।। दुर्जय पासवान ।।
झंडा गाड़ने व पोस्टर चिपकाने की सूचना के बाद पुलिस इलाके में पीएलएफआई के खिलाफ अभियान शुरू कर दी है. हालांकि दोपहर तक पुलिस गांव से झंडा व पोस्टर नहीं हटायी थी. बताया जा रहा है कि मंगलवार की देर रात कुछ उग्रवादी हथियार से लैस होकर पहुंचे थे और स्व संजय सिंह के घर गये और दीवार में पोस्टर चिपका दिया.
गांव में उग्रवादियों ने नारेबाजी की. इसके बाद स्व संजय के खेत के पास पहुंचे और लिखित लाल झंडा खेत में गाड़ दिया. खेत के पास भी 15 मिनट तक नारेबाजी करते हुए हवाई फायरिंग की. रात को डर से ग्रामीण नहीं उठे. सुबह को जब उठे तो संजय के घर पर पोस्टर साटा हुआ पाया.
* थाना के मुख्य सड़क के पास मारी गयी थी गोली
ठेकेदार संजय सिंह मुरूमकेला गांव का रहने वाले थे. 10 अक्तूबर को जब संजय थाना के समीप मुख्य सड़क से गुजर रहे थे. तभी पीएलएफआई के जोनल कमांडर तिलकेश्वर गोप के नेतृत्व में खुलेआम संजय की गोली मारकर हत्या कर दी थी.
संजय की हत्या के अब 25 दिन हो गया. परंतु अभी तक हत्याकांड में शामिल एक भी उग्रवादी व सफेदपोश नहीं पकड़ाया है. जिस दिन संजय की हत्या की गयी. उसी दिन उसकी मां का दशकर्म था. जो सूचला मिली है उसके अनुसार घटना के दिन कामडारा थाने के एक सिपाही द्वारा संजय को बुलाया गया था.
पुलिस से संजय का संपर्क था. वह जमींदार परिवार का था. संजय सिंह का क्षेत्र में काफी अच्छी पकड़ थी. जमींदार परिवार के रहने के कारण वह उग्रवादियों की हिट लिस्ट में पहले से था. जमींदार परिवार से होने, पुलिस से संपर्क व ठेकेदारी के कारण उसकी हत्या की गयी थी.
* आम जनता को परेशान न करें : गोवर्धन
संजय सिंह के नजदीकी रहे गोवर्धन सिंह ने कहा है कि संजय सिंह समाज सेवी था. जमींदार परिवार से होने के कारण वह अक्सर लोगों की मदद करता था. वह गांव में उग्रवाद को पनपने से रोक रहा था. जिसका नतीजा है कि उसे अपनी जान गंवानी पड़ी.
पीएलएफआई के सुप्रीमो दिनेश गोप का एकसूत्री मकसद लोगों को डरा धमका कर रखना है. जिसमें संजय रोड़ा बना हुआ था. जो कि दिनेश गोप को नागंवारा लगा. दिनेश गोप के इशारे पर ही तिलकेश्वर गोप, राजेश गोप ने एक योजना के तहत संजय को गोली मारी.
घायल होने के बाद संजय की रांची में मौत हो गयी थी. गोवर्धन ने कहा है कि जमींदारी प्रथा अब खत्म हो गयी है. संजय अच्छा व्यक्ति था. कभी उसमें जमींदारों का घमंड नहीं रहा है. पीएलएफआई की इस कार्रवाई से निश्चित रूप से खौफ का माहौल है. आम जनता को चैन से रहने दें.
* झंडा व पोस्टर जब्त कर लिये हैं : एसडीपीओ
बसिया अनुमंडल के एसडीपीओ दीपक कुमार ने कहा है कि घटना के दिन थाने के सिपाही ने संजय को नहीं बुलाया था. इस मामले की पुलिस ने जांच की है. बुलाने की बात गलत है.
संजय सामाजिक व्यक्ति था. उसकी हत्या के बाद पुलिस लगातार हत्यारों को पकड़ने के लिए अभियान चला रही है. एक व दो दिन में हत्यारे पुलिस गिरफ्त में होंगे. एसडीपीओ ने कहा है कि स्व संजय के घर में पोस्टर व खेत में झंडा गाड़ा गया है. जिसे पुलिस ने बरामद कर ली है. रात को झंडा गाड़ने व पोस्टर साटने में एक दो लोग थे. रात को ग्रामीणों ने एक व्यक्ति को भागते देखा था. पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है.
