गुमला : राज्य के छह अति पिछड़े जिलों की सूची में शामिल गुमला जिला के संपूर्ण विकास से संबंधित कार्ययोजना तथा प्रगति की समीक्षा बैठक सोमवार को विकास भवन सभागार में हुई. बैठक की अध्यक्षता उपायुक्त शशि रंजन ने की. उपायुक्त ने विशेष केंद्रीय सहायता एवं आकांक्षी जिला योजना के अंतर्गत जिला स्तरीय समिति के लिए निर्धारित कार्य योजनाओं की समीक्षा की.
उपायुक्त ने कहा कि उग्रवाद से अति प्रभावित गुमला जिला में शिक्षा, स्वास्थ्य एवं आधारभूत संरचना के क्रिटिकल गैप को भरने के लिए कार्य होगा. योजनाओं को तीन वर्ष में पूरा करना है, जिसका क्रियान्वयन जिला स्तरीय समिति के माध्यम से किया जाना है. उपायुक्त ने कहा कि नीति आयोग द्वारा राज्य के पिछड़े और उग्रवादग्रस्त जिले के संपूर्ण विकास के लिए आकांक्षी जिला नामक नयी योजना की शुरुआत की है.
इसमें प्रत्येक जिला को 50 करोड़ का बजट प्रावधान किया गया है. विशेष केंद्रीय सहायता अंतर्गत 34 करोड़ की कार्ययोजना में से (वर्ष 2017-18) 17 करोड़ की योजनाओं की स्वीकृति दी गयी है. वहीं समीक्षा के क्रम में विभिन्न विभागों द्वारा 20 योजनाओं की निविदा प्रक्रिया नहीं किये जाने पर उपायुक्त ने निर्देश दिया 15 से 20 दिन के अंदर निविदा प्रक्रिया पूर्ण करायें. उपायुक्त ने कहा कि योजनाओं में पारदर्शिता जरूरी है, इसलिए योजना के चयन के समय योजना के औचित्य तथा लाभान्वितों की संख्या स्पष्ट होनी चाहिए.
आंगनबाड़ी तथा विद्यालय को मॉडल केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए कार्य करें. बैठक में वन प्रमंडल पदाधिकारी श्रीकांत, आइटीडीए के परियोजना निदेशक कृष्ण किशोर, अपर समाहर्ता आलोक शिकारी कच्छप, अभियान एएसपी सरोज कुमार, सिविल सर्जन जेसी दास व जिला योजना पदाधिकारी अरुण कुमार सिंह सहित विभिन्न विभागों के कार्यपालक अभियंता एवं जिला स्तरीय पदाधिकारी उपस्थित थे.
