गुमला : जिला पंचायत प्रतिनिधि संघ गुमला के बैनर तले जिले के पंचायत प्रतिनिधियों ने छह सूत्री मांगों को लेकर बुधवार को कचहरी परिसर में धरना दिया. पंचायत प्रतिनिधियों ने त्रिस्तरीय पंचायती राज्य संस्थाओं को प्राप्त शक्तियों को प्राथमिकता के आधार पर लागू कराने की मांग की. जिला परिषद अध्यक्ष किरण माला बाड़ा ने कहा कि सरकार ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कराया. उस चुनाव में जो जीता, वह पंचायत प्रतिनिधि बना, परंतु सरकार ने अब तक पंचायत प्रतिनिधियों को अधिकार नहीं दिया है. जिस कारण ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाले विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं. योजनाओं में लूट मची है.
योजनाओं का धरातल पर सही से क्रियान्वयन नहीं हो रहा है. अध्यक्ष ने कहा कि सरकार हम पंचायत प्रतिनिधियों को अधिकार नहीं देकर हमें उपेक्षित कर रही है. जिला परिषद उपाध्यक्ष कृष्णदेव सिंह ने कहा कि अब तक सरकार द्वारा पंचायत के निर्वाचित सदस्यों को सम्मानजनक मानदेय भी नहीं दिया जा रहा है, जो सरकार के पंचायत प्रतिनिधियों के प्रति उपेक्षापूर्ण रवैये को दर्शाता है. संघ के जिलाध्यक्ष रामप्रसाद बड़ाइक व सचिव सिकंदर कुमार सिंह ने कहा कि जनप्रतिनिधियों का शासन-प्रशासन द्वारा घोर उपेक्षा की जा रही है. टोटो पंचायत के मुखिया दिनेश उरांव ने कहा कि सरकार हमारे साथ गलत कर रही है. सरकार हमें धोखा दे रही है, जिसे अब बर्दाश्त नहीं करेंगे. धरना कार्यक्रम को सुदामा उरांव, बैबुल अंसारी, देवेंद्र उरांव, भलेरिया टोपनो, बुधु टोप्पो, ब्रिजिनिया मिंज, प्रसन टोप्पो, रतनी देवी व अनूप फ्रांसिस कुजूर आदि ने भी संबोधित किया. धरना के बाद संघ के एक प्रतिनिधि मंडल ने मुख्यमंत्री के नाम उपायुक्त को छह सूत्री मांग पत्र सौंपा. मांग पत्र के माध्यम से जनप्रतिनिधियों ने विकास कार्यों के लिए पंचायत प्रतिनिधियों को राशि उपलब्ध कराने, झारखंड पंचायती राज संस्थाओं के विभिन्न विभागों द्वारा हस्तांतरित शक्तियों को लागू कराने, सम्मानजनक मानदेय देने, प्रतिनिधियों की सुरक्षा के लिए सुरक्षा गार्ड उपलब्ध कराने तथा टोल नाका टैक्स में प्रतिनिधियों को छूट दिलाने की मांग की है.
