एंबुलेंस चालक को फोन किया गया. किसी ने बात टाल दी, तो किसी ने बात सुनने के बाद मोबाइल बंद कर दिया. अंत में रायडीह पुलिस ने सीएस डॉ एसएन झा को फोन कर एंबुलेंस की मांग की. सीएस ने व्यवस्था करने की बात कही, लेकिन एंबुलेंस की व्यवस्था कराने में एक घंटा लग गया. तबतक घायल स्ट्रेचर में तड़पता रहा. इस संबंध में सीएस से पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि डीएस को कह दिया है कि एंबुलेंस उपलब्ध करा दें. डीएस डॉ आरएन यादव से पूछने पर उन्होंने कहा कि दो एंबुलेंस था, जो बाहर गया है. मैंने कॉल सेंटर से कह कर एंबुलेंस की व्यवस्था कर दी है.
मरीज तड़पता रहा, एक घंटे बाद मिली एंबुलेंस
रायडीह(गुमला): गुमला सदर अस्पताल में अभी भी अव्यवस्था है. अस्पताल प्रबंधन नहीं सुधर रहा है. इसका उदाहरण सोमवार की घटना है. सड़क हादसे में घायल यूपी के मोहम्मद हसमुद्दीन (30) सदर अस्पताल में तड़पते रहे, लेकिन समय पर उन्हें एंबुलेंस नहीं मिला. मशक्कत के बाद अस्पताल प्रशासन ने एक घंटे बाद एंबुलेंस उपलब्ध कराया. हुआ […]

रायडीह(गुमला): गुमला सदर अस्पताल में अभी भी अव्यवस्था है. अस्पताल प्रबंधन नहीं सुधर रहा है. इसका उदाहरण सोमवार की घटना है. सड़क हादसे में घायल यूपी के मोहम्मद हसमुद्दीन (30) सदर अस्पताल में तड़पते रहे, लेकिन समय पर उन्हें एंबुलेंस नहीं मिला. मशक्कत के बाद अस्पताल प्रशासन ने एक घंटे बाद एंबुलेंस उपलब्ध कराया.
हुआ यूं कि रायडीह थाना के खीराखाड़ के समीप शाम साढ़े चार बजे पिकअप वाहन के धक्के से हसमुद्दीन घायल हो गये. उनका एक पैर फ्रैक्चर हो गया था. रायडीह पुलिस घायल को लेकर गुमला अस्पताल पहुंची. डॉक्टर ने इलाज किया. स्थिति गंभीर थी. डॉक्टर ने तुरंत रिम्स रांची ले जाने के लिए रेफर कर दिया. अब बात थी कि घायल को रांची कैसे ले जाया जाये. एंबुलेंस की मांग की गयी, लेकिन अस्पताल में कोई एंबुलेंस नहीं था.