भादो सिंह की हत्या के बाद ठप पड़ा सड़क व पुल का निर्माण

गुमला: घटना आठ अप्रैल 2009 की है. समय सुबह 10-11 बजे. घटना स्थल पालकोट प्रखंड का बघिमा गुड़मा गांव. हथियारबंद उग्रवादियों ने शांति सेना के सुप्रीमो भादो सिंह की गाड़ी को घेर लिया. गाड़ी में भादो सिंह अपने नौ लोगों के साथ थे, जिसमें महिला व बच्चे भी थे. उग्रवादियों ने गाड़ी को घेर लिया […]

गुमला: घटना आठ अप्रैल 2009 की है. समय सुबह 10-11 बजे. घटना स्थल पालकोट प्रखंड का बघिमा गुड़मा गांव. हथियारबंद उग्रवादियों ने शांति सेना के सुप्रीमो भादो सिंह की गाड़ी को घेर लिया. गाड़ी में भादो सिंह अपने नौ लोगों के साथ थे, जिसमें महिला व बच्चे भी थे. उग्रवादियों ने गाड़ी को घेर लिया और गोलीबारी की. गोलीबारी में गाड़ी में बैठे कुछ लोगों की मौत हो गयी, जबकि कुछ घायल हो गये. तब उग्रवादियों ने गाड़ी में आग लगा दी, जिसमें कुछ जिंदा जल गये. नतीजा भादो सिंह ने ठेका पर जो काम लिया था, वह बंद है.

घटना के आठ साल बाद भी काम शुरू नहीं हो पाया है. ज्ञात हो कि वर्ष 2009 में भादो सिंह ने रायडीह प्रखंड के जोड़ाजाम से लेकर पालकोट प्रखंड के करौंदाबेड़ा तक सड़क व पुल बनाने का ठेका लिया था. भादो सिंह की निगरानी में काम भी तेजी से चल रहा था.

लेकिन भादो सिंह की हत्या के बाद 2009 से सड़क व पुल का काम बंद हो गया. सड़क व पुल के अभाव में इस क्षेत्र के लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. बरसात के दिनों में तो कई गांव टापू बन जाते हैं. सबसे परेशानी स्कूली बच्चों को होती है, जो बरसात में स्कूल नहीं पहुंच पाते हैं.

स्थानीय लोगों ने कई बार सड़क व पुल बनवाने की मांग की, लेकिन जनता के रहनुमाओं को जनता के दुखों पर तरस नहीं आ रही है. इस क्षेत्र के नेता भी वोट तक सिमट कर रह गये हैं. वहीं प्रशासन का मानना है कि इस क्षेत्र से उग्रवाद खत्म हो रहा है. ऐसे में ग्रामीण सवाल पूछ रहे हैं कि जब उग्रवाद खत्म है, तो फिर उग्रवाद के डर से सड़क व पुल का काम क्यों बाधित है.

डीसी को ज्ञापन सौंपा
नवाडीह गांव के जेके सिंह ने डीसी श्रवण साय को जनता दरबार में मंगलवार को ज्ञापन सौंपा है, जिसमें उन्होंने कहा है कि जोड़ाजाम से लेकर करौंदाबेड़ा स्कूल तक सड़क बन जाती है, तो लोगों को आवागमन में सुविधा होगी. अभी स्थिति यह है कि सड़क नहीं रहने के कारण लोगों को आने जाने में दिक्कत होती है. सड़क व पुल बनने से यह मिनी बाइपास के रूप में काम करेगा. साथ ही जोड़ाजाम से लेकर करौंदाबेड़ा स्कूल तक पड़ने वाली सड़कों के किनारे जितने भी गांव हैं, उन गांवों को आवागमन का सुगम साधन मिलेगा. अभी लोगों को बड़ी मुश्किल से सफर करना पड़ रहा है.

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