गुमला:झारखंड में निवास करने वाले धांगर (धनगर) का रहन-सहन, खानपान व जाति की स्थिति को जानने के लिए महाराष्ट्र सरकार का एक प्रतिनिधि मंडल दो दिवसीय दौरे में झारखंड पहुंचा. टीम में जेबियर इंस्टीट्यूट ऑफ शोसल सर्विस के डायरेक्टर डॉ एलेक्स एक्का, महाराष्ट्र सरकार के प्रतिनिधि सह टाटा सामाजिक संस्थान के प्रो डॉक्टर शैलेश व डॉक्टर गिरिजा शामिल हैं. टीम के सदस्य एसएआरवीएस के निदेशक भूषण भगत के नेतृत्व में कई लोगों से मिले.
पूर्व कल्याण आयुक्त व खाद्य सुरक्षा आयोग के चेयरमैन उपेंद्र नारायण उरांव, कुड़ूख विभाग के अध्यक्ष डॉ हरि उरांव, महिला आयोग की सदस्य वासी किड़ो, रांची विवि के एंथ्रोपोलॉजी के निदेशक डॉ करमा उरांव से मिले. उनसे धांगर के बारे में जानकारी ली. इसके बाद टीम के लोग भरनो व बेड़ो के बीच स्थित इडकिरी गांव गये, जहां फादर रॉबर्ट से मिले.
फादर रॉबर्ट ने गांव में धांगर रहे पैत्रुस बेक से टीम के लोगों की मुलाकात करायी. पैत्रुस ने बताया कि उसके पूर्वज धांगर का काम करते रहे हैं. वह खुद 30 वर्षों से धांगर रहा है. जिस घर में धांगर थे, वहां खाने पीने को मिलता था, लेकिन मजदूरी नहीं मिली. इधर, टीम के लोगों ने बताया कि महाराष्ट्र में धांगर धनगर जाति के लोग रहते हैं. इनकी संख्या अधिक है. यह जाति अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मांग कर रहा है. इसलिए महाराष्ट्र सरकार के निर्देश पर जाति की स्थिति जानने के लिए टीम देश के कई राज्यों में घूमने निकली है. बिहार राज्य का दौरा किया. पूर्णिया, कटिहार, सुपौल, किशनगंज, पूर्वी चंपारण व मधुबनी जिला में आज भी धांगर प्रथा है और इस तरह के लोग काफी संख्या में रहते हैं. बिहार में इस जाति को एससी व एसटी दोनों का दर्जा प्राप्त है. टीम की रिपोर्ट के बाद महाराष्ट्र में रहने वाली धनगर जाति को एसटी का दर्जा सरकार द्वारा दी जायेगी.
