गुमला: पालकोट प्रखंड के कुलबीर गांव में आजादी के बाद पहली बार शनिवार को प्रशासन पहुंचा और स्कूल परिसर में जनता दरबार लगाया. चारों ओर नदियों से घिरे इस गांव तक पहुंचने के लिए प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों को नदी के बीच से होकर गुजरना पड़ा.
प्रशासन को गांव में देख कर ग्रामीण खुश दिखे. दो साल पहले तक यह गांव उग्रवाद प्रभावित था, लेकिन अब उग्रवाद से मुक्त हो गया है. गांव में पहली बार पहुंचे बसिया अनुमंडल के एसडीओ अमर कुमार, एसडीपीओ बच्चनदेव कुजूर, पालकोट के बीडीओ अमित बेसरा, थानेदार राजेंद्र रजक, अन्य अधिकारी व जनप्रतिनिधि लोगों की समस्याओं से रू-ब-रू हुए. लोगों ने खुल कर इनके समक्ष अपनी बात रखी.
मरदा नदी में पुल बनवा दीजिये सर
ग्रामीणों ने मरदा नदी में पुल बनवाने की मांग की. ग्रामीणों ने कहा कि करीब 500 परिवार बरसात में टापू बन जाता है. नदी में पुल नहीं है, सड़क नहीं है. जंगल के रास्ते होकर पालकोट व गुमला आना-जाना पड़ता है. आजाद भारत के वासी है, फिर हम गुलामी में अभी तक क्यों जीयें. पुल बनाने की मांग पर एसडीओ ने कहा कि विधायक व डीसी को पत्र लिखा जायेगा. बीडीओ ने कहा कि चीरोडीह नदी में पुल निर्माण के लिए स्वीकृति मिल गयी है. अन्य नदियों में भी पुल बनाने के लिए मांग की जायेगी.
महीने में एक बार आती है एएनएम
ग्रामीणों ने कहा कि गांव में स्वास्थ्य उपकेंद्र नहीं है. एएनएम गांव महीने में एक बार आती है. दवा देकर चली जाती है. मलेरिया व डायरिया फैलने पर लोगों को गांव में ही इलाज के अभाव में रहना पड़ता है. गांव में स्वास्थ्य उपकेंद्र बनवाने की मांग की है.
32 किमी दूरी कम हो जायेगी
गांव के गन्नू साहू, कामेच्छा सिंह, गीड़ु खड़िया, नकुल सिंह व अनिल कुमार ने कहा कि अगर मरदा नदी में पुल बन जाये, तो कुलबीर गांव की दूरी गुमला से 32 किमी कम हो जायेगी. अभी ग्रामीण गुमला जाने के लिए 45 किमी की दूरी तय करते हैं. पुल बनने से गुमला व कुलबीर गांव की दूरी मात्र 13 किमी होगी. विकास की बात करें, तो गांव में सड़क नहीं है. आंगनबाड़ी केंद्र बंद है. स्कूल में मात्र एक टीचर हैं. स्वास्थ्य उपकेंद्र नहीं है. पीने के लिए स्वच्छ पानी नहीं मिलता. किसी के घर में शौचालय नहीं है.
प्रभात खबर ने गांव को सामने लाया
पालकोट प्रखंड से 25 किमी दूर जंगल व पहाड़ों के बीच स्थित कुलबीर गांव सरकार व प्रशासन की नजर से ओझल था. प्रभात खबर ने 20 सितंबर के अंक में गांव के लोगों का दर्द छाप कर गांव को सुर्खियों में लाया. गांव का हाल जानने के बाद शनिवार को प्रशासन गांव पहुंचा और गांव की समस्या जानने के लिए जनता दरबार लगाया.
