चाय की मिठास पर महंगाई की मार!एक महीने में 20 रूपये महंगी हुई चीनी

चीनी की कीमतों में 1 महीने में 20 रुपये से अधिक की वृद्धि. आम आदमी के बजट पर गहरा असर. जानें पूरी खबर.

महागामा . प्रखंड क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में पिछले एक महीने के दौरान चीनी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से आम लोगों की परेशानी बढ़ गई है . करीब एक महीने में चीनी के दाम में 20 रुपये से अधिक की वृद्धि होने से इसका सीधा असर लोगों के घरेलू बजट पर पड़ रहा है . रोजमर्रा की जरूरतों में शामिल चीनी अब ग्रामीण उपभोक्ताओं की जेब पर पहले की तुलना में अधिक बोझ डाल रही है .

चाय से लेकर मिठाई तक पर बढ़ा महंगाई का असर

ग्रामीण उपभोक्ताओं का कहना है कि पहले जिस कीमत पर आसानी से चीनी खरीदी जाती थी, अब उतनी ही मात्रा के लिए अधिक राशि खर्च करनी पड़ रही है . चाय, मिठाई और अन्य खाद्य पदार्थों में चीनी का इस्तेमाल होने के कारण कीमत बढ़ने का असर परिवार के मासिक खर्च पर भी पड़ रहा है . खासकर सीमित आय वाले परिवारों के लिए बढ़ती कीमत परेशानी का कारण बन गई है .

थोक बाजार में तेजी का खुदरा बाजार पर असर

स्थानीय दुकानदारों के अनुसार, बाजार में चीनी की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है . थोक बाजार में कीमत बढ़ने के बाद इसका असर खुदरा बाजार में भी दिखाई दे रहा है . दुकानदारों का कहना है कि उन्हें जिस कीमत पर चीनी मिल रही है, उसी के अनुसार खुदरा कीमत तय करनी पड़ रही है .

दुकानदारों के मुताबिक, कीमतों में अचानक होने वाली बढ़ोतरी के कारण ग्राहकों को भी पहले की तुलना में अधिक राशि चुकानी पड़ रही है . इससे बाजार में खरीदारी को लेकर लोगों की चिंता बढ़ी है .

खाद्य सामग्री पहले से महंगी, अब चीनी ने बढ़ाया बोझ

ग्रामीणों का कहना है कि खाद्य सामग्री की कीमतें पहले से ही बढ़ी हुई हैं . ऐसे में चीनी के दाम में अचानक हुई वृद्धि ने घरेलू बजट को और प्रभावित कर दिया है . सीमित आमदनी में परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है और रोजमर्रा की जरूरतों की वस्तुओं पर अतिरिक्त राशि खर्च करनी पड़ रही है .

कीमतों की निगरानी की मांग

ग्रामीण उपभोक्ताओं ने संबंधित विभाग से बाजार में चीनी की कीमतों की नियमित निगरानी करने की मांग की है . लोगों का कहना है कि अनावश्यक मूल्य वृद्धि पर रोक लगाई जानी चाहिए, ताकि आम उपभोक्ताओं को राहत मिल सके .

ग्रामीणों ने चिंता जताई कि यदि चीनी की कीमतों में जल्द राहत नहीं मिली, तो आने वाले दिनों में इसका असर गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के घरेलू बजट पर और अधिक पड़ सकता है .


प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat khabar news desk

यह प्रभात खबर का न्यूज डेस्क है। इसमें बिहार-झारखंड-ओडिशा-दिल्‍ली समेत प्रभात खबर के विशाल ग्राउंड नेटवर्क के रिपोर्ट्स के जरिए भेजी खबरों का प्रकाशन होता है।
Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >