पोड़ैयाहाट में सावन के साथ लौटी खेती की रौनक, किसानों ने शुरू की धान की रोपाई

बारिश से कुछ किसानों के बिचड़े सड़े, दो से बीस हजार रुपये तक का नुकसान

पोड़ैयाहाट प्रखंड क्षेत्र में सावन मास की शुरुआत के साथ ही किसानों ने खेतों की ओर रुख कर दिया है. खेतों में मेड़बंदी, जुताई और रोपाई का काम तेजी से शुरू हो गया है, जिससे गांव की धरती एक बार फिर हरियाली की ओर बढ़ रही है. जिन किसानों ने रोहिणी नक्षत्र में धान का बीज डाला था, उनका बिचड़ा अब तैयार हो चुका है और वे रोपाई में जुट गये हैं. लेकिन जिन किसानों ने प्रतिकूल मौसम के कारण रोहिणी नक्षत्र में बीज नहीं बोया था, उनके लिए यह सावन मायूसी लेकर आया है. बीज खेत में ही सड़ जाने से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है.

लगातार बारिश से बिचड़ा सड़ा, किसानों को आर्थिक झटका

किसानों नरेश यादव, संतलाल हांसदा, प्रकाश ठाकुर और रोहित सेन ने बताया कि खराब मौसम और असमय बारिश के कारण उन्होंने समय पर बीज नहीं डाला. जब बीज डाला गया तो लगातार वर्षा के कारण वह सड़ गया. इससे किसानों को दो हजार से लेकर बीस हजार रुपये तक की क्षति हुई है. कुछ किसानों ने अछरा विधि से फिर से बीज डालकर जोखिम उठाया है. उम्मीद है कि यदि अब मौसम अनुकूल रहा और बिचड़ा तैयार हुआ, तो अगस्त में धान की रोपाई की जा सकेगी. कई किसानों ने बताया कि खेतों में पर्याप्त पानी है, लेकिन बिचड़ा तैयार नहीं होने के कारण वे केवल मेड़बंदी और तैयारी का काम कर पा रहे हैं. अगर बिचड़ा तैयार हो गया और बारिश जारी रही, तो इस वर्ष अच्छी फसल की उम्मीद की जा सकती है.

मकई, मूंग, अरहर की बुआई भी प्रभावित

लगातार हो रही बारिश का असर सिर्फ धान पर ही नहीं, बल्कि मकई, मूंग, अरहर जैसी अन्य खरीफ फसलों पर भी पड़ा है. रविवार को दोपहर 12 बजे के बाद पोड़ैयाहाट इलाके में जोरदार बारिश हुई. एक दिन पहले जब मौसम साफ हुआ था, तब किसानों ने मकई की बुआई की योजना बनायी थी, लेकिन फिर हुई बारिश ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया.

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Author: SANJEET KUMAR

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