गोरसंडा में सर्पदंश से किशोरी की मौत, अंधविश्वास और इलाज में देरी बड़ी वजह

गोड्डा में बढ़ा सर्पदंश का खतरा, 10 दिनों में एक दर्जन से अधिक मामले

गोड्डा जिले में इन दिनों सर्पदंश की घटनाओं में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है. पिछले 10 दिनों के दौरान जिले के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में एक दर्जन से अधिक लोग सर्पदंश का शिकार हो चुके हैं. इसी क्रम में मंगलवार को मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के गोरसंडा गांव में सांप डंसने से 12 वर्षीय किशोरी सृष्टि कुमारी की मौत हो गयी. जून माह में सर्पदंश से मौत की यह पहली घटना है. मृतका की पहचान गोरसंडा निवासी रणधीर पंडित की 12 वर्षीय पुत्री सृष्टि कुमारी के रूप में हुई है. परिजनों के अनुसार, मंगलवार को सृष्टि अपने घर के अंदर बने छज्जे पर कुछ घरेलू सामान तलाश रही थी. इसी दौरान छज्जे के एक कोने में छिपे जहरीले सांप ने उसे डस लिया. बाद में परिजनों ने छज्जे की तलाशी ली तो एक सांप को वहां से भागते देखा. घटना के बाद परिजन उसे तत्काल सदर अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां न्यू आइसीयू वार्ड में चिकित्सकों ने उसका उपचार शुरू किया. हालांकि इलाज के दौरान उसकी मौत हो गयी. बेटी की मौत की सूचना मिलते ही माता-पिता और दादी का रो-रोकर बुरा हाल हो गया.

ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ा खतरा, सुंदरपहाड़ी में सबसे अधिक मामले

मौसम में बदलाव, भीषण गर्मी के बाद बढ़ी नमी और मानसून की दस्तक के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में सांपों का निकलना बढ़ गया है. आंकड़ों के अनुसार पिछले 10 दिनों के भीतर जिले के विभिन्न प्रखंडों से सर्पदंश के 12 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं. इनमें सबसे अधिक घटनाएं सुंदरपहाड़ी प्रखंड क्षेत्र में दर्ज की गयी हैं.

पिछले वर्षों में भी सर्पदंश से हुईं कई मौतें

2024 : 27 मई 2024 को कर्णातरी गांव में खेत में काम करने के दौरान अशोक मांझी की करैत सांप के काटने से मौत हो गयी थी. चिकित्सकों का कहना था कि यदि उन्हें समय पर अस्पताल लाया जाता तो उनकी जान बच सकती थी.

2025 : 5 जुलाई 2025 को सैदापुर गांव में 11 वर्षीय आदित्य और 8 वर्षीय स्तुति तथा निपनिया गांव में 12 वर्षीय रौशन की सर्पदंश से मौत हो गयी थी. तीनों मामलों में पहले झाड़-फूंक करायी गयी, जिसके कारण अस्पताल पहुंचने में देरी हुई. सैदापुर में तो एक घंटे के भीतर सगे भाई-बहन की मौत हो गयी थी. 17 जुलाई 2025 को उपरबिंधा गांव की 9 वर्षीय माही कुमारी की कान में सांप काटने से मौत हो गयी थी. परिजनों ने शुरुआती लक्षणों को गंभीरता से नहीं लिया था. 30 जुलाई 2025 को कनवारा गांव की 36 वर्षीय कुंती देवी की करैत सांप के काटने से मौत हो गयी थी. परिजन पहले झाड़-फूंक कराते रहे और अस्पताल ले जाने के दौरान रास्ते में उनकी मृत्यु हो गयी. उनके पीछे दो छोटे बच्चे रह गये.

मानसून में सबसे अधिक बढ़ता है खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार जून से अगस्त के बीच सर्पदंश के मामलों में सबसे अधिक वृद्धि होती है. बारिश के दौरान सांप अपने बिलों से बाहर निकल आते हैं और घरों, खलिहानों तथा खेतों के आसपास शरण लेने लगते हैं. चिंताजनक बात यह है कि अब शहरी क्षेत्र भी इससे अछूते नहीं रहे हैं. हाल ही में साकेतपुरी मोहल्ले में एक ही दिन में दो से तीन घरों में कोबरा सांप निकलने की घटनाएं सामने आयी हैं.

झाड़-फूंक और अंधविश्वास बन रहे मौत का कारण

सुंदरपहाड़ी स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सक डॉ. आकाश कुमार के अनुसार सर्पदंश से होने वाली अधिकांश मौतों के पीछे झाड़-फूंक और अंधविश्वास प्रमुख कारण हैं. उन्होंने बताया कि सैदापुर, निपनिया और कनवारा के मामलों में पीड़ितों को पहले ओझा-गुनी के पास ले जाया गया, जिससे अस्पताल पहुंचने में देरी हुई. यदि मरीजों को समय पर अस्पताल लाया जाता तो उनकी जान बचायी जा सकती थी. डॉ. कुमार ने बताया कि करैत जैसे सांप का विष न्यूरोटॉक्सिक होता है. इसके शुरुआती लक्षण काफी हल्के होते हैं, जिससे लोग स्थिति की गंभीरता को समझ नहीं पाते. यही कारण है कि उपचार में देरी हो जाती है.

रात में बढ़ जाता है खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार करैत सांप रात में अधिक सक्रिय रहता है और अक्सर घरों तथा बिस्तरों में घुस जाता है. पिछले वर्ष जिन चार बच्चों की मौत हुई थी, वे सभी रात 10 से 11 बजे के बीच सोते समय सर्पदंश का शिकार हुए थे.

क्या करें और क्या न करें

सर्पदंश को मेडिकल इमरजेंसी मानें और मरीज को तुरंत अस्पताल पहुंचायें.

झाड़-फूंक और अंधविश्वास से बचें.

बरसात के दिनों में जमीन पर सोने से परहेज करें.

मच्छरदानी के चारों किनारों को खाट के नीचे अच्छी तरह दबाकर रखें.

बच्चों को करैत और कोबरा जैसे जहरीले सांपों की पहचान तथा प्राथमिक सावधानियों की जानकारी दें.

गांवों में सांप डसे तो 100 मिनट के भीतर अस्पताल जैसी जागरूकता मुहिम चलाने की आवश्यकता है.

सर्पदंश के मामलों में एंबुलेंस सेवा का तत्काल उपयोग किया जाये.

इलाज उपलब्ध है, जरूरत जागरूकता की

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि गोड्डा में सर्पदंश से होने वाली अधिकांश मौतें इलाज के अभाव में नहीं, बल्कि इलाज में देरी के कारण हो रही हैं. अस्पतालों में एंटी-स्नेक वेनम सहित आवश्यक दवाएं उपलब्ध हैं. जरूरत केवल समय पर उपचार और जागरूकता की है. मानसून के दौरान विशेष सतर्कता बरतकर तथा अंधविश्वास छोड़कर सीधे अस्पताल पहुंचने से अधिकांश जानें बचाई जा सकती हैं.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Author: SANJEET KUMAR

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

Read More
Tags

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >