शिक्षा व खेती के क्षेत्र में जला रहे हैं अलख

सेकेंड इनिंग. दूसरी पाली में सेवानिवृति के बाद भी बुजुर्गों के हौसले बुलंद

कहते हैं कि किसी भी कार्य को करने के लिए जुनून के सामने उम्र की कोई सीमा नहीं होती. मायने रखता है इंसान के अंदर का जज्बा, जो दूसरों को प्रेरित करने का काम करता है. पथरगामा प्रखंड के ऐसे बुजुर्ग जिन्होंने सरकारी नौकरी से सेवानिवृत्ति के बाद भी समाज के उत्थान के लिए विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय होकर लोगों को प्रेरित किया है. पथरगामा निवासी सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक संजय मिश्रा ने शिक्षा के महत्व को समाज में लगातार फैलाने का कार्य जारी रखा है. वे छात्र-छात्राओं को शिक्षा की आवश्यकता और इसके प्रभाव के बारे में जागरूक करते हैं. वहीं बंदनवार गांव के सेवानिवृत्त डीडीओ एवं प्राध्यापक रंजीत कुमार दुबे भी बच्चों को शिक्षा के प्रति मोटिवेट कर यह संदेश देते हैं कि जीवन में शिक्षा कितनी महत्वपूर्ण है. सेवानिवृत्ति के बाद शिक्षक मणिकांत मंडल ने कृषि कार्य को अपनाकर आत्मनिर्भर बनने के लिए लोगों को प्रोत्साहित किया है. इन बुजुर्गों ने समाज सेवा के विभिन्न आयामों में अपनी भूमिका निभाते हुए यह साबित कर दिया है कि उम्र केवल एक संख्या है, जुनून और समर्पण से ही असली पहचान बनती है. प्रभात खबर ने इन समाजसेवी बुजुर्गों से बातचीत की, जिन्होंने अपने अनुभव और विचार साझा किये.

संजय मिश्रा : उज्जवल भविष्य की ओर बच्चों को कर रहे प्रेरित

शिक्षा समाज को बेहतर बनाने का सबसे प्रभावी साधन है. यह व्यक्ति को समाज के प्रति उसकी जिम्मेदारियों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक करती है. एक शिक्षित समाज अंधविश्वास, रूढ़िवादी सोच और भेदभाव से मुक्त होता है. शिक्षा के माध्यम से व्यक्ति अपने अधिकारों को जानता है और समाज में समानता, न्याय एवं बंधुत्व का पालन करता है. उत्क्रमित मध्य विद्यालय चौरा बालक के प्रभारी प्रधानाध्यापक के पद से 30 अप्रैल 2025 को सेवानिवृत्त हुए संजय मिश्रा सेवानिवृति के बाद से शिक्षा के प्रचार-प्रसार में पूरी ऊर्जा के साथ जुटे हैं. नौकरी के दौरान समय की कमी के कारण बच्चों को पर्याप्त मार्गदर्शन देना संभव नहीं हो पाता था, लेकिन अब वे अपने आवास पर समाज के बच्चों को पठन-पाठन कराने का अवसर दे रहे हैं. संजय मिश्रा बताते हैं कि उनका उद्देश्य बच्चों को शिक्षा के महत्व के प्रति जागरूक करना और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना है ताकि वे उज्ज्वल भविष्य की ओर कदम बढ़ा सकें. सेवानिवृति के बाद वे समाज के बच्चों के लिए शिक्षा का दीप जलाये रखने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं।

मणिकांत मंडल : कृषि के माध्यम से समाज को आत्मनिर्भर बनाने में जुटे

कृषि, जिसे खेती भी कहा जाता है, भूमि पर फसलें उगाने और पशुधन पालने की एक कला और विज्ञान है. यह मानव सभ्यता की प्राथमिक गतिविधियों में से एक है, जो भोजन, फाइबर और अन्य आवश्यक उत्पाद प्रदान करती है. कृषि न केवल हमारे भोजन का आधार है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ भी है. मध्य विद्यालय कोर के सेवानिवृत सहायक शिक्षक मणिकांत मंडल, जो 31 जनवरी 2025 को सेवानिवृत्त हुए, सेवानिवृति के बाद से समाज के लोगों को कृषि कार्य के प्रति जागरूक करने और इसे अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं. वे लोगों को वैज्ञानिक विधि से खेती करने की जानकारी देते हुए यह समझाने का प्रयास कर रहे हैं कि कृषि को अपना कर कैसे आत्मनिर्भर और सफल जीवन व्यतीत किया जा सकता है. मंडल ने कहा कि सही तकनीक और मेहनत से खेती न केवल आजीविका का स्थायी स्रोत बन सकती है, बल्कि ग्रामीण विकास में भी सहायक है. वे समाज के हर वर्ग को कृषि के महत्व को समझाने और अपनाने का संदेश दे रहे हैं, ताकि कृषि क्षेत्र में सुधार हो और ग्रामीण क्षेत्र सशक्त बन सके.

रंजीत कुमार दुबे : शिक्षा के क्षेत्र में युवाओं को कर रहे प्रोत्साहित

जहां शिक्षा है, वहां सरस्वती विराजमान होती हैं. बिना शिक्षा के जीवन अधूरा और व्यर्थ है. समाज को शिक्षित बनाने के लिए प्रयास आज भी जारी हैं. 31 जनवरी 2025 को मध्य विद्यालय बांसभीट्ठा से प्रभारी प्रधानाध्यापक के पद से सेवानिवृत्त हुए रंजीत कुमार दुबे ने शिक्षा के क्षेत्र में अपनी सेवा जारी रखी है. डीडीओ के पद पर कार्य करने के साथ-साथ प्रभारी प्रधानाध्यापक के रूप में भी अनुभव प्राप्त कर चुके रंजीत कुमार दुबे अब सेवानिवृति के बाद समाज के छात्र-छात्राओं को शिक्षित बनाने और युवा पीढ़ी को जागरूक करने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं. वे बच्चों को उनके पाठ्यक्रम में बेहतर पकड़ बनाने के लिए मार्गदर्शन देते हैं और समाज के युवाओं को शिक्षा से जोड़ने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं. उनका मानना है कि जब तक समाज के बच्चे शिक्षित नहीं होंगे, तब तक समाज का सशक्त विकास संभव नहीं है. इसलिए वे युवा वर्ग को शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ाने के लिए समर्पित हैं और इसे अपना जीवन उद्देश्य मानते हैं.

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Author: SANJEET KUMAR

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