प्रतिनिधि, बोआरीजोर . राजमहल कोल परियोजना क्षेत्र में सोमवार रात से हो रही मूसलाधार बारिश ने कोयला उत्पादन की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है . लगातार बारिश के कारण परियोजना में सामान्य दिनों की तुलना में करीब 12 हजार टन कम कोयला उत्पादन हुआ है . खदान क्षेत्र में जलजमाव और कीचड़ की स्थिति बनने से भारी वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित हुई है .
राजमहल परियोजना में सामान्य दिनों में प्रतिदिन करीब 50 हजार टन कोयला उत्पादन होता है . लेकिन लगातार बारिश के कारण उत्पादन में लगभग 25 फीसदी की गिरावट दर्ज की गयी है . इसका असर कोयला डिस्पैच और ओवरबर्डन हटाने यानी मिट्टी कटाई के काम पर भी पड़ा है .
खदान में जलजमाव, भारी वाहनों की आवाजाही प्रभावित
लगातार बारिश से खदान के कई हिस्सों में पानी जमा हो गया है . कीचड़ के कारण डंपर और अन्य भारी वाहनों का परिचालन प्रभावित हुआ है . इसके चलते उत्पादन के साथ-साथ कोयले को स्टॉक यार्ड तक पहुंचाने का काम भी धीमा पड़ गया है .
परियोजना सूत्रों के अनुसार, बारिश के कारण खदान क्षेत्र की बेंचों पर फिसलन बढ़ गयी है . ऐसे में डंपर और भारी मशीनों का परिचालन जोखिम भरा हो गया है . सुरक्षा को देखते हुए कई स्थानों पर काम रोकना पड़ा है .
स्टॉक यार्ड में पानी भरने से डिस्पैच पर भी असर
भारी बारिश का असर कोयला स्टॉक यार्ड पर भी पड़ा है . यार्ड में पानी जमा होने के कारण कोयले की लोडिंग और डिस्पैच का काम प्रभावित हुआ है . उत्पादन में कमी के साथ डिस्पैच की रफ्तार भी कम हुई है .
परियोजना प्रबंधन के सामने फिलहाल सुरक्षा के साथ उत्पादन और डिस्पैच व्यवस्था को सुचारू रखने की चुनौती बनी हुई है .
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बारिश थमते ही युद्धस्तर पर होगी भरपाई
प्रोजेक्ट ऑफिसर ओपी चौधरी ने बताया कि वर्षा ऋतु में हर साल इस तरह की परेशानी सामने आती है . खनन क्षेत्र में फिसलन होने के कारण वाहनों की आवाजाही प्रभावित होती है, जिससे उत्पादन और डिस्पैच दोनों में कमी आती है .
उन्होंने कहा कि मौजूदा गिरावट अस्थायी है . बारिश थमते ही युद्धस्तर पर काम शुरू कर उत्पादन में हुई कमी की भरपाई की जायेगी . परियोजना प्रबंधन को भरोसा है कि चालू वित्तीय वर्ष में कोयला उत्पादन और डिस्पैच का निर्धारित लक्ष्य हर हाल में पूरा किया जायेगा .
