दुर्गोत्सव. जिले के विभिन्न दुर्गा मंदिरों में हो रही है पूजा-अर्चना, तैयारी हो चुकी है पूरीप्रतिनिधि, गोड्डा
मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा जिले भर के तमाम दुर्गा मंदिर में हो रही है. शनिवार को मां दुर्गा के पांचवें रूप देवी स्कंदमाता की पूजा की गयी. इस दौरान शहर से लेकर गांव तक हर और भक्तिमय माहौल है. श्रद्धालु मां शेरावाली की पूजा-अर्चना में लगे हुए हैं. हर पंडाल चंडीपाठ के मंत्रोच्चारण से गुंजायमान है. पूजा को लेकर तमाम पूजा समितियां भी अपनी तैयारी को अंतिम रूप देने में लगी है. जिला मुख्यालय के बाबूपाड़ा में स्थित बड़ी दुर्गा मंदिर में बंगला पद्धति से मां वैष्णवी दुर्गा की पूजा-अर्चना होती है. शहर के बीचों-बीच स्थित बड़ी दुर्गा मंदिर बाबूपाड़ा का इतिहास काफी पुराना है. कमेटी अध्यक्ष ने बताया कि अंग्रेजों के जमाने से मंदिर में पूजा होती आ रही है. गोड्डा जिला मुख्यालय का एकमात्र पुराना मंदिर है, जहां बंगाली पद्धति से पूजा होती है. गोड्डा शहरी क्षेत्र के तमाम व्यापारी और कारोबारी शुरू से ही मंदिर में योगदान देते आये हैं. पूजा के दौरान मंदिर से कारगिल चौक तक भव्य मेला लगता है. यहां का विशेष आकर्षण संध्या आरती है, जहां पारंपरिक ढोल-नगाड़ों के साथ मां भगवती की आरती होती है, जिसे देखने दूर-दराज से लोग पहुंचते हैं. मां के भव्य रूप के दर्शन कर भाव-विभोर होते हैं.वैष्णवी दुर्गा मंदिर में 1986 से हो रही पूजा-अर्चना
गांधीनगर गोढ़ी दुर्गा मंदिर में पूरे विधि विधान के साथ पूजा पाठ का आयोजन किया जा रहा है. अध्यक्ष संजय यादव ने बताया कि यहां 1986 से दुर्गा पूजा का आयोजन हो रहा है. स्व जयराम पंडित, स्व भोला यादव व अन्य लोगों ने गोड्डा- भागलपुर मुख्य सडक के किनारे मंदिर की नींव रखी थी. कुछ सालों तक पंडाल में प्रतिमा स्थापित कर पूजा समारोह का आयोजन होता था. समाज के सहयोग से धीरे-धीरे भव्य मंदिर का निर्माण हुआ. तब से इलाके के लोग मां दुर्गा की पूजा करते हैं. मुख्य सड़क के किनारे होने के कारण यहां काफी संख्या में आसपास के ग्रामीण श्रद्धालु भी मां का दर्शन करने आते हैं. सालों भर मंदिर प्रांगण में शाम के समय महिलाएं पारंपरिक मंगलगीत गाती है. उन्होंने बताया की प्रथम से षष्ठी पूजा तक कथावाचक गोविंद शरण जी महाराज भागवत कथा सुना रहे हैं. सप्तमी को स्कूली बच्चों द्वारा कार्यक्रम, नवमी को डांडिया तथा दसवीं को मेला का आयोजन किया जायेगा. उपाध्यक्ष विनय पंडित, सचिव गौतम कुमार पंडित, कोषाध्यक्ष अजय कुमार उर्फ देवा, उपकोषाध्यक्ष उदेश्वर पंडित आदि कार्यकर्ताओं को पूजा समारोह की अलग-अलग जिम्मेदारियां दी है.तस्वीर:- 24 जय माता दी संघ सिनेमाहॉल चौक मंदिर की.
सिनेमा हॉल चौक : 2.5 लाख की लागत से लगी है लाइट
जिला मुख्यालय के सिनेमा हॉल चौक के पास 1993 से जय माता दी संघ द्वारा मां दुर्गा के पूजन का आयोजन किया जा रहा है. यहां पूजन के दौरान सप्तमी पूजा से ही खिचड़ी महाप्रसाद का वितरण शुरू हो जाती है. मां के दर्शन करने व महाप्रसाद ग्रहण करने शहर के साथ आसपास के गांव के श्रद्धालु बड़ी संख्या में आते हैं. पूजा कमेटी अध्यक्ष निकेश आनंद ने बताया कि मंदिर की स्थापना 1993 में हुई थी. स्व. बंकिम चंद्र चौधरी को सपनों में मां दुर्गा ने मंदिर की स्थापना व पूजा पाठ करने की त कही थी. निद्रा टूटने के बाद उन्होंने समाज के लोगों के साथ बैठक कर स्थान निर्धारित किया. समाज के लोगों के योगदान से मां दुर्गा मंदिर के लिए जमीन दी गयी. पहली बार मंदिर निर्माण नहीं होने की वजह से पहले साल की पूजा पंडाल में हुई. हालांकि दूसरे साल से समाज के लोगों के सहयोग से मंदिर निर्माण किया गया. तब से लेकर आज तक नवरात्रों में विधि-विधान से पूजा करते हैं. नौ दिनों तक पारंपरिक चंडी पाठ के साथ मां के नौ रूप की पूजा होती है. इस साल करीब 2.5 लाख की लागत से लाइटिंग की व्यवस्था की गयी है. अष्टमी को संध्या आरती के बाद डांडिया नाइट तथा 10वीं पूजा को रावण दहन व महाप्रसाद का वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया है. कमेटी में सचिव अमित कुमार झा, उपसचिव पंकज यादव, कोषाध्यक्ष नीरज कुमार झा, उपकोषाध्यक्ष अभिषेक कुमार, सदस्य कुणाल, रंजीत, गौरव, ऋतिक, सुजीत, अजीत व्यवस्था में लगे हुए हैं. प्रशासन से बेहतर व्यवस्था और साफ सफाई के लिए कई बार पुरस्कार भी मिला चुका है.
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