Godda Murder Case, गोड्डा (राणा प्रताप की रिपोर्ट): सुप्रीम कोर्ट ने गोड्डा जिले के साल 2009 के हत्याकांड में चार दोषियों को बड़ी राहत देते हुए उनकी सजा की अवधि को कम कर दिया है. जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की खंडपीठ ने कपिलदेव मंडल व अन्य द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका (SLP) पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया. पीठ ने अपने फैसले में कहा कि चूंकि घटना 17 साल पुरानी है और दोषी पहले ही लगभग दो वर्ष की सजा काट चुके हैं, इसलिए न्याय के हित में इसे पहले से भुगती गई अवधि तक सीमित करना उचित होगा.
बैल भगाने पर हुआ था विवाद
यह मामला 16 अप्रैल 2009 का है, जब एक युवक अपने घर पर मुरही (लाई) बना रहा था. इसी दौरान आरोपियों में से एक का बैल वहां आकर भूसा खाने लगा. युवक द्वारा बैल को भगाए जाने पर विवाद शुरू हो गया. इस बहस के दौरान दिलीप मंडल ने युवक के सिर पर लाठी से वार कर दिया, जिससे उसकी मौत हो गई. गोड्डा की निचली अदालत ने इस मामले में चार आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और 10,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी.
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हाईकोर्ट ने बदला था फैसला, अब सुप्रीम कोर्ट की मुहर
आरोपियों ने निचली अदालत के फैसले को झारखंड हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. हाईकोर्ट ने इसे ‘इरादतन हत्या’ के बजाय ‘गैर-इरादतन हत्या’ का मामला माना और उम्रकैद को बदलकर पांच साल के कठोर कारावास में तब्दील कर दिया था. इसके खिलाफ दोषियों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया. सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि अपीलकर्ता मुकदमे और हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान अधिकांश समय जमानत पर रहे और हाईकोर्ट का आदेश आने के बाद ही उन्हें हिरासत में लिया गया.
सजा को भुगती गई अवधि तक घटाया
खंडपीठ ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए इन सभी को आईपीसी की धारा 304 भाग II के तहत दंडनीय अपराध के लिए दोषी माना जाता है. अदालत ने कहा, “औसतन प्रत्येक अपीलकर्ता ने लगभग दो वर्ष की सजा भुगती है. घटना की उत्पत्ति और परिस्थितियों को देखते हुए हम सजा को पहले से भुगती गई अवधि तक कम करते हैं.” इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने इन अपीलों को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए मामले को निष्पादित कर दिया.
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