होम्योपैथी महाविद्यालय में हर्षोल्लासपूर्वक मनायी गयी हैनिमैन की जयंती

चिकित्सकों ने बारी-बारी से माल्यार्पण कर अर्पित किया श्रद्धासुमन

पथरगामा प्रखंड के राजकीय होम्योपैथी चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल परसपानी में शुक्रवार, 10 अप्रैल को होम्योपैथी के जनक डॉ. सैमुअल हैनिमैन की जयंती हर्षोल्लासपूर्वक मनायी गयी. इस अवसर पर महाविद्यालय सह अस्पताल परिसर में स्थापित डॉ. सैमुअल हैनिमैन की संगमरमर प्रतिमा पर प्राचार्य डॉ. अशोक कुमार पासवान, डॉ. उषा यादव, डॉ. आशीष कुमार झा सहित अन्य चिकित्सकों ने बारी-बारी से माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किया. प्राचार्य डॉ. अशोक कुमार पासवान ने अपने संबोधन में डॉ. हैनिमैन के योगदानों को याद करते हुए कहा कि होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति आज भी विश्वभर में प्रभावशीलता के लिए जानी जाती है. उन्होंने बताया कि डॉ. सैमुअल हैनिमैन जर्मनी के महान चिकित्सक व वैज्ञानिक थे, जिन्होंने होम्योपैथी की खोज की. उनका जन्म 10 अप्रैल 1755 को जर्मनी के मीसेन शहर में हुआ. उन्होंने 1779 में एरलांगेन विश्वविद्यालय से चिकित्सा की डिग्री प्राप्त की. वे बहुभाषाविद, केमिस्ट और अनुवादक थे. 1790 में सिंकोना की छाल का प्रयोग करते हुए उन्होंने सिद्ध किया कि जो पदार्थ मलेरिया के लक्षण उत्पन्न कर सकता है, वहीं उसका उपचार भी कर सकता है. 1810 में उन्होंने अपनी प्रमुख पुस्तक ऑर्गेनॉन ऑफ मेडिसिन रेशनल हीलिंग प्रकाशित की, जिसमें होम्योपैथी के सिद्धांतों को विस्तृत रूप से प्रस्तुत किया गया. प्राचार्य ने छात्रों से समाजसेवा हेतु होम्योपैथी पद्धति को निरंतर आगे बढ़ाने का आह्वान किया. इसके अतिरिक्त महाविद्यालय की ओर से आयोजित क्विज और रंगोली प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों को प्राचार्य द्वारा पुरस्कृत किया गया. कार्यक्रम में महाविद्यालय के चिकित्सक, कर्मचारी और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By SANJEET KUMAR

SANJEET KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

Tags

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >