पोड़ैयाहाट मुख्य बाजार स्थित बस स्टैंड के समीप जल निकासी की व्यवस्था चरमरा गयी है. नाली जाम हो जाने के कारण गंदा पानी ओवरफ्लो होकर सड़क पर बह रहा है, जिससे पूरे इलाके में दुर्गंध फैल गई है। पिछले तीन दिनों से स्थानीय लोग और राहगीर बदबू से परेशान हैं। लगभग 500 मीटर के क्षेत्र में लोग नाक पर कपड़ा रखकर चलने को मजबूर हैं. यह मार्ग प्रखंड क्षेत्र के दूर-दराज पंचायतों से आने वाले यात्रियों के लिए मुख्य रास्ता है, क्योंकि यहीं बस स्टैंड स्थित है. लेकिन अब उन्हें इस रास्ते से गुजरना किसी चुनौती से कम नहीं है, क्योंकि सड़कों पर गंदा पानी भरा है और सफाई की कोई व्यवस्था नहीं है. स्थानीय लोगों का कहना है कि लाखों रुपये की लागत से नाली निर्माण तो कराया गया, लेकिन कुछ ही समय में यह बेकार साबित हो गया. संवेदक की लापरवाही और आम लोगों की जागरूकता की कमी ने इस समस्या को और गहरा कर दिया है. नाली की सफाई के लिए कोई नियमित व्यवस्था नहीं है और चूंकि यह क्षेत्र नगर पंचायत के दायरे में नहीं आता, इसलिए प्रशासन भी जिम्मेदारी लेने से बचता नजर आता है.
ग्रामीणों की मांग
चंदन भगत, डब्लू भगत, मंटू ठाकुर, सज्जन भगत सहित अन्य ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल सफाई अभियान चलाने की मांग की है. उनका कहना है कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाएगा. स्थानीय लोग बताते हैं कि कुछ फुटपाथ दुकानदार भी नालियों में कचरा फेंकते हैं, जिससे जाम की स्थिति बनती है। इस लापरवाही की जिम्मेदारी से उन्हें भी अलग नहीं किया जा सकता. वर्षों से यह इलाका साफ-सफाई की व्यवस्था से वंचित है. प्रशासन एक बार निर्माण कार्य कराकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेता है, जबकि नियमित सफाई के बिना कोई भी व्यवस्था टिक नहीं सकती.क्या कहते हैं मुखिया
अब तक दो बार निजी फंड से और एक बार सरकारी फंड से नाली की सफाई करवाई जा चुकी है. बावजूद इसके, कुछ स्थानीय लोगों की आदतों में बदलाव नहीं आया है. वे लगातार नाली में कचरा फेंकते हैं, जिससे समस्या बार-बार उत्पन्न होती है. हाल ही में कुछ ग्रामीणों ने नाली की सफाई की मांग की थी, लेकिन पंचायत के पास फिलहाल कोई फंड उपलब्ध नहीं है. इसलिए मैंने सुझाव दिया कि इस बार सभी लोग मिलकर सार्वजनिक सहयोग (चंदा) से सफाई करायें. इसमें मेरा जो भी हिस्सा बनता है, वह मैं खुद दूंगा. जब तक लोगों में स्वच्छता को लेकर जागरूकता नहीं आएगी और वे स्वयं जिम्मेदारी नहीं समझेंगे, तब तक इस समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है.
– अनुपम भगत, मुखिया पोड़ैयाहाटB
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