डीडीसी श्रीकांत विषपुते ने गुरुवार को प्रखंड के भगैया स्थित मानिकपुर आजीविका महिला संकुल स्तरीय प्राथमिक स्वावलंबी सहकारी समिति लिमिटेड कार्यालय का निरीक्षण किया. इस दौरान उन्होंने पलाश-जेएसएलपीएस के माध्यम से गठित सखी मंडल, ग्राम संगठन, संकुल संगठन, उत्पादक समूह तथा अन्य सामुदायिक संस्थाओं द्वारा संचालित विभिन्न आजीविका गतिविधियों का अवलोकन किया. निरीक्षण के दौरान डीडीसी ने महिला समूहों को उपलब्ध करायी जा रही वित्तीय सहायता, बैंक क्रेडिट लिंकेज, विभिन्न विभागों के साथ समन्वय (कन्वर्जेंस) तथा आजीविका संवर्धन से संबंधित कार्यों की विस्तृत जानकारी प्राप्त की. उन्होंने इन गतिविधियों को अधिक प्रभावी, पारदर्शी एवं परिणामोन्मुख बनाने के लिए आवश्यक सुझाव एवं दिशा-निर्देश दिये. इसके बाद उन्होंने भगैया क्षेत्र में संचालित रेशम (सिल्क) उत्पादन गतिविधियों का निरीक्षण किया. इस दौरान सखी मंडल की महिलाओं एवं स्थानीय बुनकरों से कोकून से धागा तैयार करने, धागे की प्रोसेसिंग, बुनाई तथा तैयार वस्त्र निर्माण तक की पूरी प्रक्रिया की जानकारी ली. उन्होंने रेशम उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार, उत्पादों के मूल्य संवर्धन तथा विपणन व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने पर विशेष बल दिया.
भ्रमण के क्रम में डीडीसी ने ठाकुरगंगटी-मंडरो सखी सिल्क हैंडलूम प्राइवेट लिमिटेड का भी निरीक्षण किया. यहां उन्होंने रेशम उद्योग में उपयोग की जा रही आधुनिक मशीनों की कार्यप्रणाली का अवलोकन किया तथा मशीनों के माध्यम से धागा निर्माण, बुनाई और तैयार वस्त्र निर्माण की संपूर्ण प्रक्रिया का जायजा लिया. उन्होंने उत्पादन क्षमता एवं गुणवत्ता में निरंतर सुधार के लिए आवश्यक सुझाव भी दिये. इसके उपरांत उन्होंने धुनियाबांध स्थित संजीवनी आजीविका संसाधन केंद्र का भ्रमण किया. यहां कृषि, पशुपालन एवं अन्य आजीविका गतिविधियों की समीक्षा करते हुए संबंधित कर्मियों एवं सामुदायिक कैडरों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिये. उन्होंने महिलाओं की आय वृद्धि, स्वरोजगार एवं आजीविका के विविधीकरण पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया. इस अवसर पर प्रखंड विकास पदाधिकारी विजय कुमार मंडल, पलाश-जेएसएलपीएस के जिला कार्यक्रम प्रबंधक सोमेश चंद्र प्रकाश, जिला आजीविका प्रबंधक राहुल दास, बीपीएम प्रेम प्रकाश, एफटीसी शमीम अख्तर, बीएपी शंकर गुप्ता, सीसी दिवाकर मंडल, जितेंद्र कुमार, सुनील कुमार सहित जेएसएलपीएस के कैडर एवं सखी मंडलों से जुड़ी बड़ी संख्या में महिलाएं उपस्थित रहीं. भ्रमण के अंत में डीडीसी श्रीकांत विषपुते ने महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा संचालित आजीविका गतिविधियों की सराहना करते हुए कहा कि महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता, ग्रामीण उद्यमिता एवं सतत आजीविका को सशक्त बनाने में जेएसएलपीएस की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है. उन्होंने सभी संबंधित पदाधिकारियों, कैडरों एवं महिला समूहों से समन्वित प्रयासों के माध्यम से आजीविका गतिविधियों को और अधिक मजबूत एवं सफल बनाने का आह्वान किया.
