खनिज का पैसा जाए तो योजनाएं कैसे चलेंगी! एमएमडीआर विधेयक सहित राम मंदिर चंदे के हिसाब पर कांग्रेस का हमला

कांग्रेस ने एमएमडीआर संशोधन विधेयक 2026 को झारखंड के अधिकारों पर सीधा प्रहार बताया है, जिससे राज्य को भारी राजस्व घाटा होने की आशंका है. पार्टी ने यह भी मांग की है कि राम मंदिर निर्माण के लिए मिले चंदे का पूरा हिसाब सार्वजनिक किया जाए.

प्रतिनिधि, गोड्डा : जिला कांग्रेस कार्यालय, गोड्डा में ‘एमएमडीआर संशोधन विधेयक 2026’ और ‘राम मंदिर चंदे के हिसाब’ को लेकर संयुक्त प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया. प्रेस वार्ता को संताल परगना प्रवक्ता इकरारुल हसन आलम, प्रदेश कांग्रेस वरिष्ठ नेता संजय सबिस्टिन मरांडी ने संबोधित किया. इस दौरान कांग्रेस जिला अध्यक्ष याहिया सिद्दीकी मुख्य रूप से मौजूद थे.

राज्य के अधिकारों पर प्रहार का आरोप

श्री आलम ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लाया गया एमएमडीआर संशोधन विधेयक 2026 झारखंड के हक और अधिकारों पर सीधा प्रहार है.

उन्होंने कहा कि विधेयक की धारा 9डी लागू होने से राज्य सरकार की खनिज-युक्त भूमि पर उपकर लगाने की शक्ति समाप्त हो जाएगी, जिससे झारखंड को हर साल 12 से 14 हजार करोड़ रुपये के राजस्व का घाटा होगा. जुलाई 2024 में सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की बेंच द्वारा राज्यों के पक्ष में दिए गए फैसले से जुड़ा झारखंड का 1.36 लाख करोड़ रुपये का बकाया भी इस कानून के कारण प्रभावित होने की आशंका है. देश के अन्य खनन राज्यों ओडिशा, कर्नाटक, केरल, तेलंगाना का लगभग 2 लाख करोड़ रुपये का दावा भी खतरे में है.

योजनाओं पर असर की आशंका

विधेयक से राज्य का राजस्व प्रभावित होने से मंईयां सम्मान योजना, अबुआ आवास योजना, 200 यूनिट मुफ्त बिजली, सावित्री बाई फुले किशोरी समृद्धि योजना, मुख्यमंत्री रोजगार सृजन योजना और किसान ऋण माफी जैसी प्रमुख योजनाएं बाधित हो सकती हैं.

कांग्रेस की मांग है कि केंद्र सरकार सभी खनन राज्यों के साथ संवाद कर इस विधेयक पर पुनर्विचार करे और झारखंड के बकाये का अविलंब भुगतान करे.

राम मंदिर चंदे में पारदर्शिता की मांग

संजय सबिस्टिन मरांडी ने कहा कि राम मंदिर देश के करोड़ों नागरिकों की आस्था का केंद्र है, जिसमें गरीब, किसान और मजदूरों ने अपनी मेहनत की कमाई का योगदान दिया है. भगवान राम किसी एक राजनीतिक दल के नहीं हैं.

श्रद्धालुओं के मन में किसी भी तरह के संशय को दूर करने के लिए चंदे का पूरा हिसाब-किताब सार्वजनिक किया जाना चाहिए. स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए.

मौके पर मौजूद रहे

मौके पर मोहम्मद इफ्तखार रसल भी मौजूद रहे.

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By Prabhat khabar news desk

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