प्रतिनिधि, ठाकुरगंगटी. प्रखंड मुख्यालय के समीप बना कैंसर भवन आज भी इलाज की उम्मीद लगाए ग्रामीणों के लिए महज एक सपना बनकर रह गया है. हरिदेवी ग्रामीण रेफरल अस्पताल के बगल में राष्ट्रीय यक्ष्मा नियंत्रण कार्यक्रम के तहत बने इस भवन में कुष्ठ, यक्ष्मा और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज की योजना थी, लेकिन निर्माण और उद्घाटन के वर्षों बाद भी यहां इलाज शुरू नहीं हो सका.
आधारशिला से उद्घाटन तक, फिर ठहर गयी पूरी व्यवस्था
वर्ष 2002 में इस भवन की आधारशिला झारखंड के तत्कालीन राज्यपाल सैयद सिब्ते रजी ने रखी थी. वर्ष 2006 में इसका विधिवत उद्घाटन ओडिशा के राज्यपाल सह निधि के संस्थापक स्व. रामेश्वर ठाकुर की अध्यक्षता में हुआ था.
इलाके के मसीहा कहे जाने वाले स्व. रामेश्वर ठाकुर ने सुदूरवर्ती सीमावर्ती क्षेत्र में जमीन खरीदकर ट्रस्ट के माध्यम से भवन का निर्माण कराया था. उनका उद्देश्य था कि गरीब और जरूरतमंद लोगों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए भागलपुर और पटना जैसे शहरों का रुख न करना पड़े.
लेकिन उद्घाटन के बाद यहां डॉक्टरों की प्रतिनियुक्ति नहीं हो सकी. झारखंड राज्य गठन के बाद भी यह व्यवस्था धरातल पर नहीं उतर सकी और धीरे-धीरे इलाज की उम्मीद में बना भवन उपेक्षा का शिकार होता चला गया.
लाखों का भवन अब झाड़ियों और पेड़ों से घिरा
इलाज शुरू नहीं होने के कारण लाखों रुपये की लागत से बना भवन अब खंडहर में तब्दील होता जा रहा है. परिसर में चारों ओर झाड़ियां उग आयी हैं, जबकि भवन के अंदर भी पेड़ उग आये हैं. कभी क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने की उम्मीद जगाने वाला यह भवन आज सरकारी उपेक्षा की तस्वीर बनकर रह गया है.
ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते भवन का उपयोग शुरू कर दिया जाता तो आज ठाकुरगंगटी और आसपास के लोगों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए दूसरे शहरों की दौड़ नहीं लगानी पड़ती.
डेढ़ लाख आबादी को मिल सकता था सीधा लाभ
ठाकुरगंगटी प्रखंड में करीब 146 गांव और लगभग डेढ़ लाख की आबादी बतायी जाती है. इसके अलावा साहिबगंज जिले के सीमावर्ती इलाकों और भागलपुर क्षेत्र के लोगों को भी इस स्वास्थ्य केंद्र से लाभ मिल सकता था.
आज भी गंभीर बीमारी होने पर ग्रामीणों को भागलपुर समेत दूसरे बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है. आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बाहर जाकर इलाज कराना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है.
इलाके के विकास में रामेश्वर ठाकुर का रहा बड़ा योगदान
ग्रामीणों के अनुसार, स्व. रामेश्वर ठाकुर ने ठाकुरगंगटी क्षेत्र के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किये थे. उन्होंने प्रखंड कार्यालय, कॉलेज, थाना भवन, अस्पताल और नर्मदा देवी बालिका उच्च विद्यालय के लिए जमीन दान की थी.
कैंसर भवन भी उनके इसी प्रयास का हिस्सा था. उनका सपना था कि सीमावर्ती और पिछड़े क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध हों.
20 साल बाद भी अधूरा है सपना
स्व. रामेश्वर ठाकुर के निधन के बाद कैंसर भवन को शुरू कराने की दिशा में किसी जनप्रतिनिधि ने गंभीर पहल नहीं की, ऐसा ग्रामीणों का कहना है. ग्रामीण ठाकुर राजेश, धर्मेंद्र साह, ललन जायसवाल, उत्तम भगत, ब्रजमोहन महतो और राहुल कुमार झा ने कहा कि रामेश्वर ठाकुर की इच्छा थी कि क्षेत्र के लोगों को यहीं संपूर्ण स्वास्थ्य सुविधा मिले.
ग्रामीणों का कहना है कि करीब दो दशक बाद भी भवन खड़ा है और स्व. ठाकुर की याद दिलाता है, लेकिन जिस उद्देश्य से इसका निर्माण कराया गया था, वह आज भी पूरा नहीं हो सका है. ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से भवन का निरीक्षण कर इसे फिर से उपयोगी बनाने और यहां स्वास्थ्य सेवाएं शुरू कराने की मांग की है.
