विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर बोआरीजोर प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय, खिजुरिया में साथी संस्था की ओर से जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में बाल श्रम, बाल विवाह एवं बाल शोषण जैसी सामाजिक कुरीतियों के प्रति लोगों को जागरूक किया गया. विद्यालय के प्रधानाध्यापक रतनलाल हेंब्रम ने अपने संबोधन में कहा कि बाल श्रम बच्चों के मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है. उन्होंने कहा कि बचपन पढ़ाई, खेलकूद और सर्वांगीण विकास का समय होता है. ऐसे में बच्चों को श्रम में लगाना उनके भविष्य के साथ अन्याय है. परियोजना समन्वयक अमर कुमार ठाकुर ने कहा कि बाल श्रम कानूनन अपराध है. अभिभावकों को अपने बच्चों से किसी भी प्रकार का श्रम नहीं कराना चाहिए. उन्होंने कहा कि सभी बच्चों का विद्यालय जाना सुनिश्चित होना चाहिए तथा कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रहना चाहिए. बाल श्रम को पूरी तरह समाप्त करने के लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति को जागरूक होना आवश्यक है. उन्होंने बाल श्रम, बाल विवाह और बाल शोषण से संबंधित कानूनी प्रावधानों एवं संरक्षण व्यवस्था की भी विस्तार से जानकारी दी. ग्राम प्रधान गोपिंद्र हांसदा ने कहा कि गांव में स्कूल से बाहर रहने वाले सभी बच्चों की सूची एक सप्ताह के भीतर तैयार की जाएगी. इसके बाद सभी बच्चों का विद्यालय में नामांकन सुनिश्चित कराया जाएगा. कार्यक्रम के दौरान बच्चों के बीच पेंटिंग प्रतियोगिता भी आयोजित की गयी. इस अवसर पर स्टानिश लाउस मुर्मू, जशीनता किस्कू, लूकी पहाड़िया, पूजा कुमारी, मनीषा कुमारी, संतलाल हेंब्रम, सुनीराम बेसरा सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे.
बाल श्रम उन्मूलन के लिए जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार : प्रधानाध्यापक
स्कूल से बाहर बच्चों का सर्वे कर एक सप्ताह में कराया जाएगा नामांकन
