संवाददाता,गोड्डा. वर्ष 2026 में माता योगिनी की पारंपरिक वार्षिक पूजा मंगलवार की रात हर्षोल्लास और भक्तिमय माहौल में संपन्न हुई. सावन के अंतिम मंगलवार को आयोजित यह भव्य रात्रि अनुष्ठान मंदिर संचालक सत्यजीत सिंह बॉबी की अगुवाई और विपिन पंडा के सहयोग से देर रात तक चलता रहा. इस दौरान पूरा माता योगिनी परिसर ‘जय माता योगिनी’ के जयकारों से गूंजता रहा. पूजा में गोड्डा जिले के अलावा दूर-दराज के क्षेत्रों से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया और माता के दरबार में मत्था टेककर आशीर्वाद मांगा.
देर रात तक चलता रहा पारंपरिक पूजन
पारंपरिक पूजन क्रम के अनुसार अनुष्ठान की शुरुआत माता शीतला की पूजा से हुई. इसके बाद मुख्य अधिष्ठात्री माता योगिनी, लीला बाबा, पहाड़ी बाबा, श्मशान काली और काल भैरव की विधिवत पूजा-अर्चना की गयी. सभी देवी-देवताओं को जल, पुष्प, वस्त्र और नैवेद्य अर्पित किये गये.
मान्यता है कि सावन के अंतिम मंगलवार को माता योगिनी की विधिवत पूजा-अर्चना करने से श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. इसी आस्था के साथ बड़ी संख्या में भक्त रातभर मंदिर परिसर में डटे रहे.
फुलायस की परंपरा ने बढ़ाया उत्साह
पूजा के दौरान सदियों पुरानी फुलायस और बलि की परंपरा भी निभायी गयी. मान्यता के अनुसार पुजारी द्वारा चावल से बने पिरामिड पर सुपारी रखी जाती है. सुपारी के नीचे की ओर लुढ़कने को माता की ओर से फुलायस मिलना माना जाता है.
फुलायस की रस्म पूरी होते ही श्रद्धालुओं में खुशी की लहर दौड़ गयी. इसके बाद पारंपरिक बलि की रस्म भी पूरी की गयी. श्रद्धालुओं ने इसे माता का आशीर्वाद मानते हुए जयकारे लगाये.
आकर्षक सजावट और सुरक्षा के रहे इंतजाम
वार्षिक पूजा को लेकर मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया था. रातभर श्रद्धालुओं की आवाजाही को देखते हुए आयोजकों की ओर से भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा की विशेष व्यवस्था की गयी थी. पूजा के दौरान मंदिर परिसर में भक्तिमय माहौल बना रहा.
पूजा के बाद देर रात तक भंडारे का आयोजन किया गया. इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया. धार्मिक अनुष्ठान, माता के जयकारे और भंडारे के साथ वार्षिक पूजा भक्तिमय वातावरण में संपन्न हुई.
