सड़क के अभाव में विकास से कोसों दूर कित्ता केंदुआ गांव

प्रखंड मुख्यालय से महज एक किलोमीटर दूर आदिवासी बहुल गांव आज भी मूलभूत सुविधा से वंचित

एक ओर सरकार ग्रामीण क्षेत्रों के चहुंमुखी विकास का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर आजादी के सात दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद भी कई गांव बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं. बसंतराय प्रखंड मुख्यालय से महज एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित आदिवासी बहुल कित्ता केंदुआ गांव इसका जीवंत उदाहरण है, जहां आज भी ग्रामीण सड़क सुविधा के लिए संघर्ष कर रहे हैं. सांचपुर साखी पंचायत अंतर्गत स्थित इस गांव तक पहुंचने के लिए आज भी ग्रामीणों को पगडंडी का सहारा लेना पड़ता है. गांव में सड़क नहीं होने के कारण लोगों को दैनिक जीवन के कार्यों के साथ-साथ आपातकालीन परिस्थितियों में भी भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. ग्रामीणों ने बताया कि बरसात के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है. बारिश के दिनों में गांव का संपर्क लगभग कट जाता है और यह किसी टापू की तरह नजर आने लगता है. ऐसे समय में प्रखंड मुख्यालय या अन्य स्थानों तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो जाता है. ग्रामीणों के अनुसार सबसे अधिक परेशानी गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और बीमार लोगों को होती है. सड़क नहीं होने के कारण चिकित्सा सुविधा तक समय पर पहुंचना भी एक बड़ी चुनौती बन जाता है.

चारपहिया वाहन नहीं पहुंच पाते गांव

ग्रामीणों ने बताया कि गांव तक केवल दोपहिया वाहन ही किसी तरह पहुंच पाते हैं. चारपहिया वाहन ले जाने के लिए अप्रैल और मई माह तक इंतजार करना पड़ता है. उस समय खेतों के मेड़ काटकर अस्थायी रास्ता बनाया जाता है, जिसके बाद किसी तरह वाहन गांव तक पहुंच पाते हैं. सड़क सुविधा के अभाव का असर सामाजिक जीवन पर भी पड़ रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि शादी-विवाह जैसे कार्यक्रमों के आयोजन में काफी दिक्कतें आती हैं. कई बार दूसरे गांवों के लोग सड़क नहीं होने के कारण इस गांव में वैवाहिक संबंध स्थापित करने से भी कतराते हैं.

ग्रामीणों ने सड़क निर्माण की उठाई मांग

ग्रामीण रंजू कुमारी बेसरा, अंजेला बेसरा, छोटे लाल बास्की, बड़की हांसदा, प्रदीप मुर्मू, अनुज सोरेन, ग्राम प्रधान राजकुमार मुर्मू, बबीता मरांडी, ताला मुर्मू, गणेश हांसदा, शैलेंद्र मुर्मू, मसीचरन हांसदा सहित अन्य ग्रामीणों ने जिला प्रशासन एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों से गांव तक शीघ्र सड़क निर्माण कराने की मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण होने से न केवल आवागमन की समस्या दूर होगी, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में भी गांव के विकास को नयी गति मिलेगी.

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Author: SANJEET KUMAR

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