28 अप्रैल को अत्यंत शुभ संयोग में मनेगा अक्षय तृतीया

गोड्डा : वाराणसी पंचांग के अनुसार वैशाख शुक्ल तृतीया तिथि का शुभारंभ 28 अप्रैल (शुक्रवार) को दोपहर एक बज कर आठ मिनट से शुरू होकर 29 अप्रैल (शनिवार) को प्रात: 10 बज कर 39 मिनट तक रहेगी. राष्ट्रीय पंचांग के अनुसार तृतीया तिथि का शुभारंभ शुक्रवार (28 अप्रैल) को 10 बज कर 28 मिनट से […]

गोड्डा : वाराणसी पंचांग के अनुसार वैशाख शुक्ल तृतीया तिथि का शुभारंभ 28 अप्रैल (शुक्रवार) को दोपहर एक बज कर आठ मिनट से शुरू होकर 29 अप्रैल (शनिवार) को प्रात: 10 बज कर 39 मिनट तक रहेगी. राष्ट्रीय पंचांग के अनुसार तृतीया तिथि का शुभारंभ शुक्रवार (28 अप्रैल) को 10 बज कर 28 मिनट से शुरू होकर शनिवार (29 अप्रैल) की सुबह छह बज कर 55 बजे तक होगी. इस प्रकार शास्त्रोक्त मध्याह्न व्यापिनी तृतीया तिथि दोनों ही तरह से 28 अप्रैल को ही प्राप्त हो रही है.

जिसके कारण अक्षय तृतीया उसी दिन मनायी जायेगी. हालांकि कहीं-कहीं उदया तिथि लेने के कारण कुछ लोग इसे 29 अप्रैल (शनिवार) को भी मनायेंगे. शुक्रवारस रोहिणी नक्षत्र, सौभाग्य योग, मध्यान्ह व्यापिनी अक्ष्य तृतीया 28 अप्रैल को ही प्राप्त हो रही है. जो इस व्रत के लिउ उत्तम संयोग माना जायेगा. व्रती इस दिन किसी नदी या पवित्र जल में स्नान करने के पश्चात नियत स्थान पर भगवान विष्णु का यथाविधि शेड़षोपचार विधि से पूजन करें. इसमें भगवान विष्णु को पंचामृत से स्नान कराने के पश्चात उन्हें सुगंधित पुष्प,

ऋतुफल आदि अर्पित करते हैं. इस पूजन में श्रीनारायण के निमित्त गेहूं या जाै का सत्तू, जबकि भगवान परशुराम के लिए कोमल ककड़ी और दयग्रीव के निमित्त फुलाये चने अर्पित करने का विधान हैं. वैसे पूजा में गेहूं -चने के सत्तू के साथ ही दही, चावल, गुड़ एवं फलों का रस, दुग्ध निर्मित पदार्थ जैसे मावा, मिठाई आदि भी अर्पित किया जाता है. पूजन के उपरांत सामथ्र्यानुसार स्वर्ण, जल पूरित धर्मघट, अन्न, शीतल रस तथा ग्रीष्मपयोगी वस्तुओं का दान एवं पितृ तर्पण ब्राह्मण, भोज आदि अवश्य कराना चाहिए.

गुप्तदान का है महत्व
इस तिथि को गुप्त दान का काफी महत्व है. इसके लिए श्रीहरि का पूजन करने के फश्चात कुष्मांड में भर कर समयानुसार द्रव्य आदि का दान करना श्रेयस्कर माना जाता है. मान्यता के अनुसार इस दिन प्रयास करने, नये व्यवसाय आदि आरंभ करने, पनशाला की व्यवस्था करने को अति शुभ फलदायी माना जाता है. इस दिन किये किसी शुभ कार्य का फल चूंकि अनंत होता है, इसलिए समाज में इसी दिन विवाहादि शुभ कार्य संपन्न कराने को भी श्रेयस्कर समझा जाता है. विशेष रूप से विवाह संस्कार संपन्न कराने का समाज में काफी चलन है. मान्यता के अनुसार इस दिन विवाह के लिए कोई मुहुर्त्त भी नहीं देखना पड़ता, क्योंकि इसे अबूझ मुहुर्त्त माना गया है.
28 तक होगा बंध पत्र का रजिस्ट्रेशन
अक्षय तृतीया को लेकर शुक्रवार को राष्ट्रीय स्वर्ण बंध-पत्र रजिस्ट्रेशन की आखिरी तारीख है. 24 से बिक्री शुरू हो गयी है. गोड्डा डाक घर से मिली जानकारी के अनुसार मुख्य डाक महाध्यक्ष के पत्र के मुताबिक वर्ष 2017-18 के तहत डाक घर में स्वर्ण बंध-पत्र की खरीदारी के लिये हर व्यक्ति कम से कम एक ग्राम एवं अधिकतम 500 सौ ग्राम का बांड प्राप्त कर सकते हैं. एक ग्राम बांड की कीमत 2901 रुपये है. इस पर 2.50 प्रतिशत वार्षिक ब्याज मिलेगा. आवेदन के साथ केवाइसी के तहत वोटर आइडी, आधार कार्ड, पासपोर्ट, पेनकार्ड संलग्न करना है. ड्राफ्ट, चेक से भी खरीदारी की जा सकती है. बांड की अवधि आठ वर्ष की है.

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