गोड्डा में कुपोषित बच्चों की भरमार

कुपोषण केंद्र में बच्चों का नहीं हो रहा उचित देखरेख गोड्डा : गोड्डा में कुपोषित बच्चों की भरमार है. खास तौर पर सुंदरपहाड़ी, बोआरीजोर, पोड़ैयाहाट में कुपोषित बच्चों की संख्या सर्वाधिक बतायी जा रही है. इस वर्ष अब तक कुल 376 बच्चों के कुपोषित चिह्नित होने पर इलाज के लिए कुपोषण उपचार केंद्र में भर्ती […]

कुपोषण केंद्र में बच्चों का नहीं हो रहा उचित देखरेख
गोड्डा : गोड्डा में कुपोषित बच्चों की भरमार है. खास तौर पर सुंदरपहाड़ी, बोआरीजोर, पोड़ैयाहाट में कुपोषित बच्चों की संख्या सर्वाधिक बतायी जा रही है. इस वर्ष अब तक कुल 376 बच्चों के कुपोषित चिह्नित होने पर इलाज के लिए कुपोषण उपचार केंद्र में भर्ती कराया जा चुका है. पिछले एक वर्ष में गोड्डा में 364, महागामा में 100, पथरगामा में 87, सुंदरपहाड़ी में 82 व पोड़ैयाहाट में 95 कुपोषित बच्चों को चिह्नित कर इलाज किया गया था.
महागामा कुपोषण उपचार केंद्र में चलती है मनमानी
महागामा कुपोषण उपचार केंद्र में मनमानी चलती है. केंद्र में ईलाजरत बच्चों के माता को प्रति दिन के हिसाब से मिलने वाली क्षतिपूर्ति में दो सौ रूपया नहीं दिया जा रहा है. केंद्र में बच्चों के पोषण का भी ख्याल नहीं रखा जा रहा है.
क्या कहती है मातायें
केंद्र में इलाजरत चार वर्ष की लक्ष्मी कुमारी की मां उर्मिला देवी ने बताया कि दस दिन से बेटी का इलाज हो रहा है. अब तक मात्र चार सौ रूपया ही दिया गया है. दस दिन से इलाजरत तनु कुमार की मां उषा देवी ने बताया कि एक भी पैसा नहीं दिया गया है. डेढ़ माह के
फरहान अख्तर की मां हैसुन निशा व चार माह के सैमुन खातुन की मां बीबी नजरीना ने बताया कि तीन दिन हो गये हैं. एक भी पैसा नहीं दिया गया है.
पहाड़िया के दो कुपोषित बच्चे की भी देखभाल में लापरवाही
बोआरीजोर प्रखंड के कुसुमघाटी पहाड़िया मंगला मालतो के दो वर्षीय पुत्र अविनाश मालतो व एक वर्षीय अनिकेत मालतो के पोषण व इलाज में लापरवाही बरती जा रही है. मां शांति मालतो ने बताया कि 13 दिन से दोनों बच्चे कुपोषण उपचार केंद्र में भर्ती हैं. उसे अब तक क्षतिपूर्ति हेतु कोई राशि नहीं दी गई है.
कुपोषण उपचार केंद्र मात्र छह बेड का
महागामा रेफरल अस्पताल में कुपोषण उपचार केंद्र में मात्र छह बेड ही है. जबकि यहां बोआरीजोर, ठाकुरगंगटी, मेहरमा व महागामा क्षेत्र के कुपोषित बच्चों को इलाज के लिए भर्ती कराया जाता है. केंद्र में बेड की कमी से कुपोषित बच्चों का इलाज सही ढंग से नहीं हो पाता है.
क्या कहते हैं चिकित्सा पदाधिकारी
” कुपोषण केंद्र प्रभारी को भुगतान करने का निर्देश दिया गया है. दो चार दिन राशि देने में देरी होती है. बड़ा बाबू से पूछा जाएगा. क्षतिपूर्ति दो सौ रूपया देय है. मेन भवन जर्जर हो जाने के कारण अलग से कमरे में केंद्र को शिफ्ट कराया गया है. जगह की कमी है.”
-डॉ जेपी भगत, चिकित्सा पदाधिकारी.
क्या कहते हैं बड़ा बाबू: महागामा रेफरल अस्पताल के बड़ा बाबू विनय झा ने बताया कि केंद्र में इलाजरत बच्चों के माता को क्षतिपूर्ति सौ रूपये प्रति दिन के हिसाब से दिये जाने का निर्देश प्राप्त हुआ है. 21 दिन इलाज होने पर एक मुस्त राशि बच्चे की मां को दी जाती है.

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