मेहरमा के अमौर गांव में श्रीमद्भागवत कथा का दूसरा दिन

बुजूर्गों की सेवा से बढ़ कर कोई तीर्थ नहीं: साध्वी प्रेमा तस्वीर:05 में कथा करती साध्वी प्रेमा, 06 में उपस्थित भीड़ प्रतिनिधि, मेहरमामेहरमा प्रखंड के अमौर पंचायत में वासंती नवरात्रि के अवसर पर आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा महायज्ञ सह ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन उपस्थित श्रद्धांलुओं ने कथा का अमृत पान किया. अयोध्या […]

बुजूर्गों की सेवा से बढ़ कर कोई तीर्थ नहीं: साध्वी प्रेमा तस्वीर:05 में कथा करती साध्वी प्रेमा, 06 में उपस्थित भीड़ प्रतिनिधि, मेहरमामेहरमा प्रखंड के अमौर पंचायत में वासंती नवरात्रि के अवसर पर आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा महायज्ञ सह ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन उपस्थित श्रद्धांलुओं ने कथा का अमृत पान किया. अयोध्या से आयी साध्वी प्रेमा सखी ने मंगलवार को संबोधित करते हुए कहा कि बुजूर्गों की सेवा सबसे बड़ी तपस्या है, जो व्यक्ति मां-बाप की सेवा करता है, कहीं पूजा करने की आवश्यकता नहीं है. भागवत ग्रंथ सब ग्रंथों से ऊंचा है. हरिद्वार के गंगा तट पर सर्वप्रथम सनकादिक ऋषियों द्वारा यह कथा सुनायी गयी थी. कथा श्रवण के यजमान स्वयं ब्रह्म ऋषि नारद थे. ग्रंथ में श्रीकृष्ण जी विराजमान हैं. संतों का असली धर्म श्री राधा नाम ही है. कथा श्रवण से मनुष्य के द्वारा किये गये सारे पाप नष्ट होते हैं. मौके पर उनके साथ आये सहयोगी कलाकार सहित घनश्याम झा आदि लोग मौजूद थे. आयोजन समिति सदस्यों में बीडीओ राजीव कुमार, निरंजन सिन्हा, अभियंता कृष्ण कुमार व बलबड्डा थाना प्रभारी हरिनारायण साह द्वारा सोमवार को दीप प्रज्जवलित कर कथा का उदघाटन किया गया था.

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