निमियाघाट थाना क्षेत्र के पंजाबी टोला निवासी छोटू रवानी ने बताया कि उनकी पत्नी रिया देवी को शुक्रवार की सुबह प्रसव पीड़ा शुरू हुई थी. इसके बाद उसकी भाभी बबीता देवी उसे डुमरी रेफरल अस्पताल लेकर आयी. ड्यूटी पर मौजूद नर्स ने प्रसव करवाया. परिजनों का आरोप है कि बच्चे के जन्म के तुरंत बाद से ही उसकी हालत सामान्य नहीं थी. छोटू के अनुसार जन्म के कुछ समय बाद ही नवजात लगातार कराहने लगा. उसने कई बार अस्पताल में मौजूद नर्स से बच्चे को डॉक्टर को दिखाने की मांग की, लेकिन उनकी बातों को नजरअंदाज कर दिया गया. वहीं, बबीता ने बताया कि बच्चा दूध भी ठीक से नहीं पी रहा था. नर्स से पूछा था कि बच्चे को दूध पिलाया गया है या नहीं, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला. कहा कि पूरी रात बच्चा दर्द से कराहता रहा, लेकिन रातभर कोई डॉक्टर उसे देखने नहीं आये. परिजनों का आरोप है कि अस्पताल के डॉक्टरों की घोर लापरवाही के कारण बच्चे की जान चली गयी. बताया कि शनिवार की पूर्वाह्न 11 बजे बच्चे की हालत और बिगड़ गई और उसकी मौत हो गयी. परिजनों ने बताया कि जब उन्होंने बच्चे की मौत की जानकारी अस्पताल में उपस्थित डॉक्टर को दी, तो डॉक्टर ने उल्टा उन पर ही गंभीर आरोप लगा दिया. इसकेपरिजन और अधिक आक्रोशित हो गए और अस्पताल परिसर में हंगामा शुरू कर दिया. नवजात की मौत के बाद माता-पिता और अन्य परिजन बच्चे के शव को गोद में लेकर अस्पताल परिसर में धरने पर बैठ गए और जोर-जोर से अस्पताल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे. परिजनों का कहना था कि यदि समय पर डॉक्टर बच्चे को देख लेते और उचित इलाज किया जाता, तो नवजात की जान बच सकती थी.
सूचना पर पहुंची पुलिस
हंगामे की खबर सुनने के बाद डुमरी पुलिस अस्पताल पहुंची और हंगामा कर रहे परिजनों का समझाने का प्रयास किया, लेकिन परिजन कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे. सूचना पर रेफरल अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ राजेश कुमार महतो वहां पहुंचे. उन्होंने परिजनों से मुलाकात कर पूरी घटना की जानकारी ली. परिजनों ने कहा उन्होंने बार-बार डॉक्टर को बुलाने की गुहार लगाई, लेकिन किसी ने उनकी नहीं सुनी. परिजनों ने दोषी डॉक्टर और नर्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की. लापरवाह कर्मियों को तुरंत निलंबित करने पर जोर दिया. डॉ महतो ने परिजनों को आश्वासन दिया कि पूरे मामले की जांच करायी जायेगी और यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही पायी जाती है, तो दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जायेगी. स्थानीय लोगों ने भी अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाये. कहा कि यहां डॉक्टरों की अनुपस्थिति में नर्सों के भरोसे मरीजों का इलाज किया जाता है.
पीड़िता ने कार्रवाई के लिए दिया आवेदन
इस पूरे मामले में पीड़िता ने अस्पताल प्रशासन को आवेदन देकर दोषी कर्मियों को निलंबित करने की मांग की है. इधर, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने मामले की जांच के लिए सीएस को पत्र लिखा है. पीड़िता रिया कुमरी ने आवेदन में कहा है कि 16 जनवरी को 11:40 बजे बच्चे के जन्म के बाद उसकी तबीयत लगातार खराब होती रही. डॉक्टर और नर्स को कई बार सूचना देने के बावजूद कोई देखने नहीं आया. कर्मचारियों द्वारा यह कहा गया कि डॉक्टर आएंगे तभी इलाज होगा. 17 जनवरी को बच्चे की मौत हो गयी. आवेदन में दोषी डॉक्टर, नर्स और कर्मचारियों को तत्काल निलंबित करने की मांग की गई है.
आरोप निराधार : प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी
इस मामले में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने परिजनों के आरोपों को निराधार बताया. उन्होंने कहा कि रात में ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक और नर्स को नवजात की तबीयत खराब होने की कोई सूचना नहीं दी गयी थी. नवजात की मौत शनिवार के पूर्वाह्न 11:40 बजे हुई है और जन्म के बाद शिशु पूरी तरह स्वस्थ था. नियमानुसार 24 घंटे बाद मां और बच्चे को डिस्चार्ज किया जाना था. 24 घंटे स्वस्थ रहने के बाद अचानक हुई मौत के कारणों की जांच की जा रही है. उन्होंने कहा कि मामले की जानकारी सिविल सर्जन को दे दी गयी है. जांच समिति गठित कर पूरे मामले की जांच कराने का आग्रह किया गया है. यदि किसी भी स्वास्थ्यकर्मी की लापरवाही सामने आती है, तो कार्रवाई की जायेगी.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
