सदर अस्पताल में अल्ट्रासाउंड व सीटी स्कैन जैसी महत्वपूर्ण जांच सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने से मरीजों को काफी परेशानी हो रही है. चिकित्सक द्वारा जांच लिखे जाने के बाद मरीजों को निजी क्लिनिकों का रुख करना मजबूरी हो जाती है. सदर अस्पताल जिले का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है, जहां शहर के साथ-साथ विभिन्न प्रखंडों से भी लोग इलाज कराने के लिए पहुंचते हैं. उम्मीद लेकर आनेवाले कमजोर तबका के लोगों के लिए निजी क्लीनिकों का रुख करना संभव नहीं होता.
झेलनी पड़ती है कई स्तर की परेशानी
कई मरीज सड़क हादसा, पेट दर्द की समस्याओं या अन्य गंभीर बीमारियों की शिकायत लेकर यहां आने वालों को जरूरी जांच की सविधा नहीं मिल पाती. ऐसे मामलों में चिकित्सक मरीजों की प्राथमिक उपचार के बाद आवश्यक जांच कराने के लिए पर्चा लिख देते हैं. दुर्घटना में घायल मरीजों के लिए सीटी स्कैन काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है, ताकि सिर या शरीर के अंदरूनी हिस्सों में लगी चोट की सही जानकारी मिल सके. सदर अस्पताल में यह सुविधा नहीं रहने से कई बार गंभीर मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद धनबाद, रांची, बोकारो जैसे बड़े शहरों के अस्पतालों के लिए रेफर कर दिया जाता है. इस प्रक्रिया में मरीजों के परिजनों को एंबुलेंस की व्यवस्था करने से लेकर दूसरे शहरों तक ले जाने तक की अतिरिक्त परेशानी झेलनी पड़ती है.
बिचौलियों की हो रही चांदी
अस्पताल में सीटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं होने का फायदा बिचौलिये भी उठा रहे हैं. ऐसे लोग अस्पताल परिसर में दिनभर सक्रिय रहते हैं. ये लोग मरीजों को निजी जांच केंद्रों तक ले जाते हैं. अस्पताल में जब चिकित्सक किसी मरीज को सीटी स्कैन या अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह देते हैं और जांच पर्ची थमा देते हैं, उसी समय कुछ बिचौलिये मरीजों और उनके परिजनों के पीछे पड़ जाते हैं. बताया जाता है कि इन बिचौलियों और कुछ निजी जांच केंद्रों के बीच साठ-गांठ होती है. कई बार मरीजों को ऐसे जांच केंद्रों में भी भेज दिया जाता है, जहां उनका दोहन होता है. मरीजों के पास विकल्प नहीं होने का बिचौलिये भरपूर फायदा उठाते हैं.
