लोगों ने सामूहिक रूप से गंगा मां की पूजा और आरती की. इसके बाद कार्यशाला का आयोजन किया गया. इस दौरान अतिथि परिचय के साथ संगठन मंत्र, सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ तथा आगंतुकों द्वारा गंगा पूजन की महत्ता पर विचार दिया गया. कहा कि आज ही के दिन ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष दशमी को मां गंगा का अवतरण पृथ्वी लोक पर हुआ था. आज पूरा विश्व जलसंकट से गुजर रहा है. जल के दुरुपयोग को रोकने और जल बचाने पर विशेष जोर देते हुए संकल्प लिया गया. लोगों ने कहा कि वर्तमान समय में गंगा पूजन और जल संरक्षण का संदेश एक दूसरे का पूरक बन गया है.
जल की सुरक्षा, संरक्षण तथा स्वच्छता का लिया संकल्प
संच संरक्षक व जिला सामाजिक सद्भाव प्रमुख विनोद कुमार पांडेय ने जल की महत्ता पर प्रकाश डाला. कहा कि जल ही जीवन है. हम प्रकृति पूजा के निमित्त जल की सुरक्षा, संरक्षा, स्वच्छता तथा एक-एक बूंद जल संचयन पर ध्यान रखें. अपने-अपने नजदीकी स्तर पर जो जहां हैं, उस स्थान पर जल संचयन पर विशेष जोर दें. पंचतत्व में एक महत्वपूर्ण तत्व जल है. इसके बगैर जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है. कार्यक्रम का संचालन संभाग गतिविधि प्रमुख नरेंद्र प्रसाद ने किया.
आयोजन में इन्होंने किया सहयोग
आयोजन में खंड कार्यवाह आशीष तर्वे, गायत्री परिवार के मदन पांडेय, राकेश पांडेय, लीलावती देवी, ललिता देवी, प्रियंका देवी, जनक दुलारी वर्मा, अशोक महतो, सुनील यादव, सरस्वती देवी, बबीता देवी, पुदीना कुमारी, सुनैना देवी, सुनीता देवी, झूलन देवी, गीता देवी, लक्ष्मी देवी, पूजा, उषा, मंजू देवी समेत अन्य की भूमिका रही.
नदी पूजन कार्यक्रम का आयोजन
डुमरी में गंगा दशहरा के अवसर पर सोमवार की सुबह जामताड़ा नदी में एकल अभियान के तहत नदी पूजन कार्यक्रम का आयोजन किया. मौके पर अंचल संस्कार शिक्षण प्रमुख वीरेंद्र सोरेन, संत शिक्षा प्रमुख सुनीता देवी, संच प्रमुख मालती देवी, करमचंद महतो, भाजपा नेता केदार महतो सहित सभी आचार्यों ने विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना कर राष्ट्र व समाज की सुख-समृद्धि की कामना की. वीरेंद्र सोरेन ने कहा कि यह कार्यक्रम भारतीय संस्कृति, परंपरा एवं प्रकृति संरक्षण के प्रति समर्पण का प्रेरक उदाहरण है.
