सुनील सहायक अध्यापक है.गिरोह दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों के किसानों को अपना निशाना बनाता है. जो किसान सरकारी योजनाओं के तहत सिंचाई पंप के लिए आवेदन करते थे, ठग कृषि विभाग से उनका डाटा हासिल कर लेते थे. इसके बाद वे कृषि विभाग का अधिकारी या कर्मी बनकर किसानों को फोन करते थे और यह विश्वास दिलाते थे कि उनका सिंचाई पंप स्वीकृत हो चुका है. पंप लेने की औपचारिक प्रक्रिया पूरी करने के बहाने उन्हें गिरिडीह शहर बुलाया जाता था. ठग किसानों को एसपी आवास के आसपास मिलने के लिए बुलाते थे, ताकि सरकारी माहौल दिखाकर भरोसा जीता जा सके. वहीं पर कागजी कार्यवाही, रजिस्ट्रेशन शुल्क या अन्य बहाने से उनसे नकद या ऑनलाइन पैसे ऐंठ लिये जाते थे. ठगी की रकम मिलने के बाद आरोपी मोबाइल बंद कर लेते थे.
अधिकारियों-सा गेटअप, बातों के जाल में फांसते थे ठग
ठगी करने वाला गिरोह सिर्फ फोन कॉल तक ही सीमित नहीं था. ठग खुद को बड़े अधिकारी के रूप में पेश करते थे. ठग महंगे कपड़े पहनते थे. सलीकेदार पहनावा और आत्मविश्वास से भरे अंदाज को देखकर किसान फंस जाते थे. ठग शहर में बुलाने के बाद किसानों के सामने दो विकल्प रखते थे- जीएसटी के साथ पंप लेना या बिना जीएसटी के. सीमित आमदनी वाले किसान स्वाभाविक रूप से सस्ते विकल्प को चुन लेते थे. यहीं से ठगी की असली पटकथा शुरू होती थी. ठग मौके पर ही नकद पैसे ले लेते थे. पैसे लेने के बाद आरोपी किसानों से आधार कार्ड, पैन कार्ड या अन्य जरूरी दस्तावेज की एक-एक प्रति मांगते थे. जब किसान दस्तावेज दे देते, तो ठग बहाना बनाते थे कि एक और कॉपी की जरूरत है और पास की दुकान से जेरॉक्स करवा लाने को कहते थे. भरोसे में आये किसान जैसे ही कागजात की कॉपी कराने के लिए वहां से हटते, ठग उनके पैसे लेकर फरार हो जाते थे.
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने बनायी रणनीति
ठगी के शिकार एक किसान ने नगर थाना में शिकायत की. नगर थाना पुलिस ने सीधे कार्रवाई करने के बजाय सूझबूझ के साथ ठगों को पकड़ने की रणनीति बनायी. योजना के तहत एक किसान को ठगों के पास भेजा गया, ताकि रंगे हाथ पकड़ा जा सके. जैसे ही किसान ठगों द्वारा बताये स्थान पर पहुंचा और उनके कहे अनुसार पैसे सौंपे, पहले से मौके पर तैनात पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई कर तीनों को दबोच लिया. पुलिस ने आरोपियों के पास से ठगी में प्रयुक्त मोबाइल और अन्य सामान जब्त किये हैं.
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