ग्रामीण जर्जर सड़क व पेयजल संकट से जूझ रहे हैं. खासकर विद्यार्थियों को विद्यालय जाने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. रंजीत दास, मोहन राणा, सुमन विश्वकर्मा, राजू विश्वकर्मा, सकलदेव राणा, हरिहर विश्वकर्मा, योगेश विश्वकर्मा, तेजी महतो, राजकुमार राणा, ठाकुरचंद राणा, प्रेमचंद राणा समेत अन्य ग्रामीणों के अनुसार गांव की अधिकांश सड़कें पूरी तरह टूट चुकी हैं. जगह-जगह बड़े गड्ढे हो गये हैं, जिनमें नालियों का पानी भर जाता है. जल जमाव से स्थिति और खराब हो जाती है. बरसात में सड़कों पर पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है. जल -माव के कारण सड़क और नाली फर्क करना मुश्किल हो जाता है. ऐसे में पैदल चलने वाले कई बार गिरकर घायल हो चुके हैं. ग्रामीण महिलाओं और बुजुर्गों को भी आवागमन में दिक्कती होती है.
चापाकल हैं खराब
गांव में पेयजल की समस्या भी विकराल रूप ले चुकी है. कई मोहल्लों में चापाकल या तो खराब पड़े हैं, या उनसे दूषित पानी निकल रहा है. मजबूरी में लोगों को दूर-दराज या फिर कुआं से पानी लाना पड़ता है. दूषित पानी के कारण बीमारियों के फैलने की आशंका भी बनी रहती है. ग्रामीणों का कहना है कि इस समस्या को लेकर कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से शिकायत की जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है. ग्रामीणों ने प्रशासन से गांव की समस्या दूर करने की मांग की है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
