जिले में स्वास्थ्य विभाग के आउटसोर्सिंग कर्मियों का कार्य बहिष्कार जारी रहने से स्वास्थ्य सेवा प्रभावित हो गयी है. लंबित मांगों को लेकर आउटसोर्सिंग कर्मी कार्य बहिष्कार कर धरने पर बैठे हुए हैं. इसका सीधा असर सदर अस्पताल समेत जिले के अन्य सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों की व्यवस्था पर साफ तौर पर देखने को मिल रहा है, जहां मरीजों और उनके परिजनों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. हड़ताल के कारण अस्पतालों की साफ-सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गयी है. वार्डों, ओपीडी परिसर, शौचालयों और अस्पताल परिसर में गंदगी पसरी हुई है, जिससे संक्रमण फैलने की आशंका बढ़ गयी है. मरीजों का कहना है कि समय पर बेड उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं, दवाओं के वितरण में भी परेशानी हो रही है और कई जरूरी सेवाएं प्रभावित हैं. अस्पतालों में सफाई कर्मी, वार्ड ब्वॉय, स्ट्रेचर बियरर, सुरक्षा कर्मी समेत अन्य आवश्यक सेवाओं में आउटसोर्सिंग कर्मियों की अहम भूमिका होती है. इनके हड़ताल पर चले जाने से डॉक्टरों और नियमित कर्मचारियों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है. सीमित संसाधनों के बीच अस्पताल प्रबंधन किसी तरह व्यवस्था संभालने का प्रयास कर रहा है, लेकिन मरीजों की बढ़ती संख्या के कारण हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं. इलाज के लिए दूर-दराज से अस्पताल पहुंचे मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं. कई मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है, जबकि गंभीर मरीजों के परिजन सबसे अधिक परेशान नजर आ रहे हैं.
बकाया वेतन भुगतान, इपीएफ-इएसआई व नियुक्ति पत्र समेत सात सूत्री मांग पर जोर
इसके अलावा सभी कर्मियों के नवंबर और दिसंबर माह का वेतन, इपीएफ, इएसआई तथा पूर्व की सभी कटौतियों की राशि भी लंबित है, जिसका अविलंब भुगतान किया जाना चाहिए. कर्मियों ने सरकार (श्रम विभाग) द्वारा घोषित वेतन वृद्धि और बोनस का समय पर भुगतान सुनिश्चित करने की भी मांग की है. साथ ही सभी पदों पर कार्यरत कर्मियों को नियुक्ति पत्र दिए जाने की मांग उठाई गई है, ताकि उनकी सेवा स्थिति स्पष्ट हो सके. आंदोलनरत कर्मियों का कहना है कि जिन कर्मचारियों के पास तकनीकी डिग्री है, उन्हें कुशल कामगार की श्रेणी में रखते हुए उसी अनुरूप वेतन का भुगतान किया जाये. इसके साथ ही यह भी मांग की गई है कि मानदेय की राशि हर हाल में प्रत्येक माह की 7 तारीख तक भुगतान सुनिश्चित किया जाये, ताकि कर्मियों को आर्थिक संकट का सामना न करना पड़े. कर्मियों ने यह भी आरोप लगाया कि अनुत्तीर्ण कंप्यूटर ऑपरेटरों का स्किल टेस्ट का परिणाम अब तक जारी नहीं किया गया है, जिससे उनकी पद बहाली लंबित है. उन्होंने मांग की कि स्किल टेस्ट का रिजल्ट अविलंब जारी कर संबंधित पदों पर बहाली की जाए. इसके अलावा आउटसोर्सिंग कर्मियों ने सिविल सर्जन से मांग की है कि सभी प्रखंडों के प्रभारी को प्रत्येक माह की 5 तारीख तक उपस्थिति (एब्सेंटी) पर हस्ताक्षर करने के लिए बाध्य किया जाए, ताकि वेतन भुगतान में देरी न हो और कर्मियों को समय पर उनका मानदेय मिल सके. कर्मियों ने साफ कहा है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक हड़ताल जारी रहेगी.आउटसोर्सिंग कर्मियों की मांगों को बताया जायज, कंपनी पर कार्रवाई की चेतावनी
डुमरी के विधायक जयराम महतो सोमवार को गिरिडीह सदर अस्पताल पहुंचे. यहां उन्होंने सबसे पहले जेएलकेएम के बैनर तले अपनी सात सूत्री मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे आउटसोर्सिंग कर्मियों से मुलाकात कर पूरे मामले की जानकारी ली. इस दौरान विधायक ने कर्मियों की सभी मांगों को जायज बताते हुए आउटसोर्सिंग कंपनी को चेतावनी दी कि यदि समय रहते मांगों पर पहल नहीं की गयी, तो आंदोलन और तेज किया जायेगा, साथ ही कंपनी के खिलाफ कार्रवाई कराने का भी प्रयास किया होगा. विधायक ने कहा कि यह अक्सर देखने को मिलता है कि जब भी आउटसोर्सिंग कर्मी बकाया वेतन या अन्य मांगों को लेकर आंदोलन करते हैं, तो कंपनी कुछ दिनों के लिए पहल करती है, लेकिन बाद में फिर वही स्थिति उत्पन्न हो जाती है. ऐसा नहीं होना चाहिए. कभी एक-दो महीने का बकाया वेतन दे दिया जाता है और फिर से भुगतान बंद हो जाता है, जिससे कर्मियों को बार-बार सड़क पर उतरना पड़ता है. यदि सरकार आउटसोर्सिंग कंपनियों के माध्यम से काम करवा रही है, तो यह उनकी जिम्मेदारी है कि कंपनियां अपने कर्मियों के साथ बेहतर व्यवहार करें और समय पर वेतन सहित सभी सुविधाएं दें. अन्यथा सरकार को ऐसी कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिये.आउटसोर्स कंपनी ने पांच कर्मियों को कार्य मुक्त किया
इधर, आउटसोर्स कर्मियों के कार्य बहिष्कार आंदोलन के बीच बालाजी डिटेक्टिव फोर्स नामक आउटसोर्स कंपनी ने कड़ा कदम उठाते हुए पांच कर्मियों को कार्य मुक्त करने का पत्र जारी कर दिया है. कंपनी ने गिरिडीह के असैनिक शल्य चिकित्सक सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी गिरिडीह को लिखे गये पत्र में कहा है कि गिरिडीह जिला अंतर्गत सदर अस्पताल एवं अन्य प्रखंड में कुछ कर्मियों द्वारा कार्य में घोर लापरवाही और स्वास्थ्य सेवाओं में बाधा उत्पन्न की गयी है. कर्मियों के अनुशासनहीनता के आलोक में सदर अस्पताल में तैनात फार्मासिस्ट आफताब आलम, लैब असिस्टेंट सुनील कुमार, लैब टेक्निशियन सिकंदर अंसारी, गांडेय में तैनात लैब टेक्नीशियन रंधीर कुमार और सरिया में तैनात एमएसडब्ल्यू विवेक राय को तत्काल प्रभाव से कार्य मुक्त किया जा रहा है.70 प्रतिशत कामकाज पर असर : आउटसोर्सिंग संघ
गिरिडीह जिला आउटसोर्सिंग संघ के अध्यक्ष आफताब आलम का कहना है कि वादाखिलाफी करने के कारण कार्य बहिष्कार किया गया है. 70 प्रतिशत कामकाज पर असर पड़ा है. कहा कि मानवता के नाते कार्य बहिष्कार से ब्लड बैंक, पोस्टमार्टम कार्य और डायलिसिस यूनिट को मुक्त रखा गया है. बताया कि पूर्व में भी विभिन्न मांगों के समर्थन में आउटसोर्स कर्मियों ने कार्य बहिष्कार किया था. इसके बाद आउटसोर्सिंग कंपनी के प्रतिनिधियों ने सात में से पांच मांगों को मानते हुए लिखित समझौता किया. लेकिन अब इस समझौते को भी मानने से इंकार किया जा रहा है. श्री आलम ने कहा कि आउटसोर्स कंपनी मांगों पर सकारात्मक पहल करने के बजाय दमनात्मक कार्रवाई पर उतारू है. कार्य बहिष्कार में शामिल पांच कर्मियों की सेवा स्थगित कर दी गई है. अगर पुन: बहाली नहीं हुई तो आंदोलन को तेज किया जायेगा.समझौता का प्रयास किया जा रहा है : सिविल सर्जन
गिरिडीह के सिविल सर्जन डॉ शेख मोहम्मद जफरूल्लाह ने कहा कि कार्य बहिष्कार का असर चिकित्सा व्यवस्था पर पड़ा है. उन्होंने बताया कि गिरिडीह जिले में विभिन्न अस्पतालों में काफी संख्या में आउटसोर्स कर्मियों की तैनाती की गई है. विशेषकर ग्रामीण क्षेत्र में स्थित स्वास्थ्य केंद्रों पर हड़ताल का असर हुआ है. बताया कि काफी कम संख्या में स्थायी कर्मी हैं. कुछ अस्पतालों में वैकल्पिक व्यवस्था की गयी है. आउटसोर्स कर्मी भी बातचीत करने के बजाये कार्य बहिष्कार पर उतारू हैं. उन्होंने कहा कि चार माह में से दो माह का मानदेय कर्मियों को दिया जा चुका है. एक माह का मानदेय शीघ्र ही भुगतान कर दिया जाएगा. अन्य मांगें छोटी है. त्रिपक्षीय समझौता का प्रयास किया जा रहा है.
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