कार्यक्रम का उद्घाटन दीप प्रज्वलन व सरस्वती वंदना से हुआ. स्वाति सिन्हा ने कहा कि भारत के विकास में पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं का अहम योगदान है. महारानी लक्ष्मीबाई, अहिल्या बाई होलकर, सावित्री बाई फुले, महारानी दुर्गावती हरिके समेत अन्य महिलाओं ने देश की आजादी व शैक्षिक विकास में अपना अहम योगदान दिया. मधुश्री ने कहा कि संतान माता-पिता के दो शरीरों को एक प्राण बना देते हैं. इसलिए संतान को आत्मज कहा गया है. परिवार में संस्कारक्षम वातावरण, राष्ट्र चिंतन, समाज कल्याण के कार्य करने का सभी परिवारजनों का स्वभाव कैसे बने, परिवार संस्कारों की पाठशाला कैसे बने आदि बातों का हमें विचार करना होगा. सरिता कुमारी ने कार्यक्रम की भूमिका व उद्देश्य पर विस्तार से प्रकाश डाला.
विशिष्ट माताओं को किया गया सम्मानित
कार्यक्रम में विशिष्ट माता का पुरस्कार सरोज देवी, मीरा देवी व इंदु देवी को दिया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता शिखा मंडल व संचालन रानी कुमारी ने किया. मौके पर आचार्या प्रियंका देवी, चंचला देवी, अनुपम कुमारी व नंदिनी कुमारी समेत विद्यालय के आचार्य व सैकड़ों की संख्या में महिलाओं ने भाग लिया.
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