इस मामले में मृतका के पिता जोगेश्वर दास द्वारा अज्ञात लोगों पर हत्या का आरोप लगाते हुए मुफस्सिल थाना में आवेदन पर प्राथमिकी दर्ज कर ली गयी है. पिता द्वारा दिये गये आवेदन में एक अहम बिंदु सामने आया था.
ट्यूशन जाने के दौरान रोकटोक करते थे दो युवक
आवेदन में उन्होंने उल्लेख किया है कि बीते कुछ दिनों से उनकी बेटी पायल को ट्यूशन जाने के दौरान दो युवक रास्ते में रोक-टोक और परेशान किया करते थे. हालांकि, पायल उन युवकों की पहचान या नाम अपने परिजनों को नहीं बता पायी थी. इसी बिंदु को आधार बनाकर पुलिस ने मामले की जांच को नये एंगल से आगे बढ़ाया है. सूत्रों के अनुसार पुलिस अब उस पूरे रूट की गहन जांच कर रही है, जिससे होकर पायल नियमित रूप से ट्यूशन जाया करती थी. इस क्रम में रास्ते में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले जा रहे हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि घटना से पहले या बाद में पायल किन लोगों के संपर्क में आयी थी और उसके साथ कोई संदिग्ध गतिविधि तो नहीं हुई. इसके साथ ही पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों को भी जांच के दायरे में लिया है. मृतका के मोबाइल फोन का सीडीआर भी निकाला जा रहा है, ताकि उसके संपर्कों, कॉल्स और लोकेशन से जुड़े अहम सुराग मिल सके.
धनबाद में मेडिकल बोर्ड की उपस्थिति में हुआ पोस्टमार्टम
पायल के शव को पुलिस ने कब्जे में लेने के बाद प्रारंभिक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए पोस्टमार्टम के लिए गिरिडीह सदर अस्पताल लाया. मामले की गंभीरता और संदिग्ध परिस्थितियों को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन की ओर से पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया, ताकि जांच में किसी भी तरह की त्रुटि न रह जाए. हालांकि, पोस्टमार्टम से पूर्व मृतका के परिजनों ने मांग रखी कि मामले की निष्पक्ष और गहन जांच के लिए केवल सामान्य पोस्टमार्टम ही नहीं, बल्कि शव की फॉरेंसिक जांच भी कराई जाए. परिजनों का कहना था कि फॉरेंसिक जांच से ही मौत के वास्तविक कारणों, घटना के समय की परिस्थितियों से जुड़े अहम साक्ष्य सामने आ सकते हैं. इधर, गिरिडीह सदर अस्पताल में फॉरेंसिक जांच की सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण मेडिकल बोर्ड ने इस संबंध में जिला प्रशासन को अवगत कराया. इसके बाद उपायुक्त के आदेश पर यह निर्णय लिया गया कि शव को पोस्टमार्टम और फोरेंसिक जांच के लिए एसएनएमएमसीएच धनबाद भेजा गया. एसएनएमएमसीएच में मेडिकल बोर्ड की उपस्थिति में गुरुवार को पोस्टमार्टम किया गया.
