इसकी शुरुआत दो जनवरी 2026 से हो गयी है. अभियान के तहत सभी प्रकार के सुलहनीय मामलों की पहचान कर उन्हें मध्यस्थता के माध्यम से निष्पादित करने का प्रयास किया जायेगा, ताकि अधिक से अधिक वादों का त्वरित, सुलभ और आपसी सहमति के आधार पर समाधान हो सके. अभियान का उद्देश्य आम नागरिकों को लंबी न्यायिक प्रक्रिया से राहत दिलाना और न्यायालयों पर मामलों के बोझ को कम करना है. मध्यस्थता के लिए जिन मामलों को प्राथमिकता दी जायेगी, उनमें वैवाहिक व पारिवारिक विवाद, चेक बाउंस से जुड़े मामले, सड़क दुर्घटना से संबंधित वाद, आपराधिक प्रकृति के सुलहनीय मामले, भूमि विवाद व बंटवारा वाद, संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) विवाद तथा श्रम कानून से जुड़े मामले शामिल हैं. बताया गया कि मध्यस्थता के माध्यम से मामलों का निपटारा दोनों पक्षों की सहमति से होता है, जिससे यह प्रक्रिया सस्ती, त्वरित और स्थायी साबित होती है.
आमलोगों से लाभ लेने की अपील
इसमें अपील की कोई जटिलता नहीं रहती और मामलों का अंतिम रूप से निष्पादन हो जाता है. माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्र के लिए मध्यस्थता के प्रथम चरण की सफलता को देखते हुए इसके द्वितीय चरण की शुरुआत की है. आमजनों से अपील की गयी है कि वे अधिक से अधिक सुलहनीय मामलों को मध्यस्थता के लिए प्रस्तुत कर इस अभियान का लाभ उठायें.
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