इस क्षेत्र को सालाना करोड़ों का मुनाफा देने वाला कोक प्लांट के वर्ष 1999 में बंद होने के बाद अब प्रमुख इकाई सीसीएल वर्कशॉप के अस्तित्व पर ग्रहण लग गया है. पिछले कुछ वर्षों से सीसीएल वर्कशॉप अपराधियों के निशाने पर रहा है. यहां लगातार चोरी व लूटपाट की घटनाएं घटित होतीं रहीं. इससे सीसीएल को खासा नुकसान उठाना पड़ा है. अब स्थिति यह है कि निरंतर आपराधिक घटनाओं के कारण प्रबंधन ने सीसीएल वर्कशॉप को बंद करने का निर्णय लिया है.
शिफ्ट किये जा रहे उपकरण
हालांकि, अभी बंद करने को लेकर लिखित आदेश जारी नहीं किया गया है, लेकिन यहां के उपकरणों को अन्यत्र शिफ्ट करने का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है. वर्कशॉप पर छाये संकट को लेकर यहां पर कार्यरत कर्मचारियों ने चिंता व्यक्त किया है, वहीं ट्रेड यूनियनों के नेताओं ने भी प्रबंधन के इस निर्णय पर आपत्ति दर्ज किया है.सात जनवरी को लूटपाट के बाद प्रबंधन गंभीर
बता दें कि सात जनवरी की मध्य रात्रि हथियारबंद अपराधियों ने सीसीएल वर्कशॉप में लूटपाट की घटना को अंजाम दिया था. इस घटना में अपराधियों ने सुरक्षा प्रहरियों को बंधक बनाकर लूटपाट व तोड़फोड़ की थी. वहीं, सीसीटीवी के डीवीआर भी अपने साथ ले गये. इस घटना से पूर्व भी एक दर्जन से अधिक चोरी की घटना यहां हो चुकी है. आबादी के बीच स्थित वर्कशॉप में चोरी की घटना प्रबंधन के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है. यूं तो इस क्षेत्र में सीसीएल सिक्यूरिटी गार्ड के अलावे होमगार्ड के महिला-पुरुष जवान प्रतिनियुक्त हैं, इसके बाद भी आपराधिक घटनाओं पर विराम नहीं लगा. गिरिडीह कोलियरी से कोयला के साथ लाखों के लोहे की लूट से कंपनी को काफी नुकसान हो रहा है. यही वजह है कि पिछले दिनों एसीसी की बैठक में सीसीएल प्रबंधन ने वर्कशॉप को बंद करने की बात कह दी है.
काफी पुराना है सीसीएल वर्कशॉप का इतिहास
गिरिडीह कोलियरी के वर्कशॉप का इतिहास काफी पुराना है. यह वर्कशॉप 1857 में स्थापित सीसीएल गिरिडीह कोलियरी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है. वर्कशॉप में कोल टब, पंप रिपेयरिंग, गैराज शॉप, कारपेंटर शॉप थे. यहां पर सीसीएल के विभिन्न कोलियरियों से मोटर पंप व ट्रांसफॉर्मर मरम्मत के लिए आता था. कोल टब दूसरे कोलियरियों में सप्लाई की जाती थी. पूर्व में यहां पर लगभग 1200 कर्मी काम काम करते थे. लेकिन, अब इस वर्कशॉप अस्तित्व समाप्त होने वाला है. लगातार सेवानिवृत्ति की वजह से वर्तमान में लगभग 50 कर्मी रह गये हैं. फिलहाल यहां पर सबमर्सेबल पंप व मोटर मरम्मत का कार्य किया जाता है. साथ ही साथ कुछ अन्य कार्य भी होते हैं.ईस्ट इंडियन रेलवे ने 1905 में की थी कोक प्लांट की स्थापना, अब सिर्फ बचा है अवशेष
वर्ष 1905 में ईस्ट इंडियन रेलवे ने गिरिडीह कोलियरी के बनियाडीह में कोक ओवेन प्लांट की स्थापना की थी. यहां से बिहार के जमालपुर रेल कारखाना में हार्ड कोक भेजा जाता था. समय बीतने के साथ सीसीएल गिरिडीह कोलियरी को सालाना करोड़ों का मुनाफा देने वाला यह प्लांट सिस्टम की भेंट चढ़ गया. कोक निर्माण के लिए स्टीम कोयला की आपूर्ति बंद होने से वर्ष 1999 में प्लांट बंद हो गया. इसके बाद इस प्लांट से लोहे व कोक की चोरी होने लगी. सूत्रों की मानें तो चोरों ने करोड़ों के लोहे पर हाथ साफ कर दिया. पिछले ढाई दशक में यहां से बेशकीमती कल-पुर्जे समेत भारी भरकम लौह सामग्री की चोरी हो गयी. अंग्रेजी हुकूमत के दौरान स्थापित कोक प्लांट आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है. यह इकाई कोलियरी की रीढ़ मानी जाती थी. लेकिन, प्रबंधकीय अदूरदर्शिता व राजनीतिक इच्छा शक्ति की कमी के कारण यह खंडहर में तब्दील हो गया है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
