स्थिति यह है कि अब पुल जर्जर होने लगा है. बता दें कि वर्ष 2016 में तीन करोड़ रुपये की लागत से पुल निर्माण को लेकर विधायक नागेंद्र महतो ने योजना का शिलान्यास किया था. पुल वर्ष 2017-18 में बनकर तैयार हो गया. लेकिन सर्वे रोड व पुल के बीच लगभग 60 फीट जमीन माखमरगो गांव के ही असगर अंसारी की आ गयी. उसने रैयती जमीन के बदले मुआवजा की मांग संवेदक व विभाग के अधिकारियों से की. इसे लेकर ना ही अधिकारी व संवेदक ने रैयत से ना, तो वार्ता की और ना ही इसमें कोई दिलचस्पी दिखायी. इसके बाद असगर ने अपनी जमीन पर बड़ा ट्रेंच काटकर सड़क को अवरुद्ध कर दिया.
चार की जगह 14 किमी दूरी तय करनी पड़ती है
इस पुल से किसी तरह से बाइक का आवागमन होता है, लेकिन चारपहिया वाहनों का आना-जाना पूरी तरह से बंद है. ग्रामीणों ने बताया कि पुल के चालू होने के बाद माखमरगो मोड़ से गिरिडीह आवागमन में चारपहिया चालकों को काफी सुविधा होती. पुल चालू नहीं होने से चार किमी दूरी के जगह पर 14 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है. ग्रामीण प्रकाश पंडित, शंकर पासवान, रत्न पंडित, दीपक पासवान, विनय पासवान, सद्दाम अंसारी, मिथुन पंडित, मनोज राय, राहुल पासवान, असगर अंसारी ने डीसी से अविलंब पुल से सर्वे रोड तक सड़क बनाकर आवागमन को चालू कराने की मांग की है.
क्या कहते हैं विभागीय एसडीओ
विभाग के एसडीओ सुभाष दास ने कहा कि गुरुवार को स्थल निरीक्षण कर स्थिति का जायजा लिया जायेगा. इसके बाद आगे की कार्यवाही की जायेगी.
