बता दें कि पथ निर्माण विभाग की जमीन के साथ-साथ रेलवे और निगम की जमीन पर भी लोगों ने स्थायी और अस्थायी रूप से कब्जा जमा रखा है. स्टेशन रोड में रेलवे की जमीन पर कई दुकानें स्थायी रूप से बना ली गयीं हैं. गिरिडीह शहर के पचंबा से लेकर टावर चौक तक, टावर चौक से लेकर काली बाड़ी चौक तक, काली बाड़ी चौक से लेकर मौलाना आजाद चौक तक, मौलाना आजाद चौक से स्टेशन रोड होते हुए स्टेशन तक, मौलाना आजाद चौक से लेकर मुस्लिम बाजार होते हुए बड़ा चौक तक, बड़ा चौक से लेकर गांधी चौक तक, बड़ा चौक से लेकर बरवाडीह मोड़ तक, काली बाड़ी चौक से मकतपुर चौक होते हुए बरगंडा तक, बस स्टैंड से लेकर मौलाना आजाद चौक तक और बीबीसी रोड पर लगभग हर जगह फुटपाथ दुकानदारों ने मुख्य मार्ग की जमीन को अतिक्रमण कर लिया है. ऐसे में इन मार्गों से वाहनों का गुजरना दूभर हो गया है.
कई स्थानों पर सड़क हो गयी संकरी
कई स्थानों पर अतिक्रमण से सड़कें इतनी संकरी हो गयीं हैं कि उन सड़कों से होकर गुजरना लोगों के लिए मुसीबत बन गया है. ट्रैफिक जाम हो जाने से जगह-जगह आवश्यक सेवा में लगे एंबुलेंस, दमकल, स्कूल बसों आदि के संचालन में भी काफी परेशानी हो रही है और जाम के कारण 10-15 मिनट की दूरी तय करने में वाहनों को घंटों लग जाता है. जाम में गाड़ियां रेंगती रहती हैं. इससे लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. यही वजह है कि सिस्टम के प्रति शहरवासियों में आक्रोश देखा जाता है.
कई मॉल व मार्केट के आगे तीन लेयर में लगे होते हैं दोपहिया वाहन
गिरिडीह शहर में अब कई मॉल भी बनकर तैयार हो गये हैं. इसके अलावे कई स्थानों पर मार्केट भी है, जहां कई दुकानें होती है. इन स्थानों में मुख्य सड़क पर मनमानी करते हुए वाहन संचालक अपने दोपहिया लगाते हैं. मनमानी इस कदर देखी जा सकती है कि कई स्थानों पर तीन-तीन लेयर में दोपहिया लगाकर सड़क पर आवागमन बाधित कर दिया जाता है.नगर निगम और ट्रैफिक वाले बने रहते हैं मूकदर्शक
शहर के मुख्य मार्ग का अतिक्रमण और अतिक्रमण होने से ट्रैफिक जाम की समस्या ऐसी है जिससे प्रति दिन लोग त्रस्त हैं. लेकिन गिरिडीह नगर निगम के साथ-साथ ट्रैफिक वाले भी मूकदर्शक बने हुए हैं. नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों की शिथिलता के कारण ही अतिक्रमण हटाये जाने के बाद भी फिर से मुख्य मार्ग का अतिक्रमण कर लिया जाता है और फुटपाथ पर दुकान खोल दिये जाते हैं. यह भी सच है कि अतिक्रमण हटाओ अभियान में प्रशासन के पक्षपातपूर्ण रवैया के कारण स्थायी रूप से अतिक्रमण हट नहीं पा रहा है. फलस्वरूप एक-दूसरे को अतिक्रमण करते देख गांव वाले भी अपनी सब्जी की दुकानें सड़क पर ही लगाना शुरू कर देते हैं. ट्रैफिक पुलिस की बात करें तो ये ग्रामीण इलाके से आने वाले दोपहिया और चार पहिया वाहनों से वैध और अवैध वसूली में ही व्यस्त देखे जाते हैं. ट्रैफिक जाम को हटाने में इनकी कोई विशेष दिलचस्पी नहीं होती है. यही कारण है कि जहां-तहां वाहनों को लगाकर लोग शहर में इधर-उधर मंडराते रहते हैं. तीन-तीन लेयर में अतिक्रमण किये जाने वाले इलाके से भी नगर पुलिस के साथ-साथ पुलिस के वरीय अधिकारी और ट्रैफिक पुलिस वाले भी गुजरते हैं, लेकिन वे भी मूकदर्शक बने रहते हैं.प्रशासन तुष्टीकरण की नीति छोड़ अभियान को ले रहे तटस्थ
गिरिडीह शहर के लोगों का मानना है कि शहर में अतिक्रमण की समस्या अधिकारियों की शिथिलता के कारण ही उत्पन्न हो रही है. तुष्टीकरण और राजनीति के कारण अधिकारी कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर पाते. गिरिडीह डिस्ट्रिक्ट चेंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष निर्मल झुनझुनवाला कहते हैं कि गिरिडीह शहर में अतिक्रमण और ट्रैफिक जाम एक बहुत बड़ी समस्या है. सिर्फ फुटपाथ पर बैठे दुकानदारों और ठेले वालों पर कार्रवाई न कर प्रशासन को सभी स्थायी और अस्थायी अतिक्रमण को हटाना चाहिए. इस मामले में विभागों को कठोर कार्रवाई करने की जरूरत है. प्रशासन चुनिंदा इलाके में कार्रवाई की खानापुरी कर चुप्पी साध लेती है. यदि सभी सरकारी विभाग वाले अपने-अपने जमीन से अतिक्रमण मुक्त कराने की दिशा में पहल करे तो काफी हद तक अतिक्रमण की समस्या से मुक्ति मिलेगी. रेलवे की जमीन पर खुलेआम कब्जा किया जा रहा है और गिरिडीह रेलवे स्टेशन में बैठे अधिकारी चुपचाप इस दृश्य को देख रहे हैं. वहीं, पथ निर्माण विभाग वाले नक्शा भी जारी करने में आनाकानी कर रहा है और अतिक्रमण भी नहीं हटा रहा है. श्री झुनझुनवाला ने कहा कि 1998 में तत्कालीन उपायुक्त ने सख्ती से संबंधित विभागों के नक्शा के आधार पर शहर के अधिकांश इलाके को अतिक्रमण से मुक्त कराया था. भाजपा के जिलाध्यक्ष रंजीत राय कहते हैं कि अब प्रशासन की तुष्टीकरण नीति नहीं चलेगी. यदि शहर से अतिक्रमण हटाना है तो वे नियम संगत तटस्थ होकर अतिक्रमण हटाओ अभियान चलायें. पिक एंड चूज की व्यवस्था न हो. उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाती रही तो फिर जोरदार आंदोलन चलाया जायेगा.
आंबेडकर चौक से कचहरी चौक तक हटाया गया फुटपाथों से कब्जा
नगर निगम व नगर थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने सोमवार को अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया. शहर वासियों को अतिक्रमण की समस्या से निजात दिलाने को लेकर आंबेडकर चौक से लेकर कचहरी चौक तक अतिक्रमण हटाओ अभियान चला. इस अभियान का नेतृत्व नगर निगम के सहायक आयुक्त अशोक हांसदा कर रहे थे. अतिक्रमण हटाओ अभियान की शुरुआत आंबेडकर चौक से की गयी. इसके बाद कचहरी चौक होते हुए सदर अस्पताल तक सड़क के दोनों किनारे अतिक्रमण को हटाया गया. अभियान के दौरान बॉबकट मशीन से फुटपाथियों की अस्थायी दुकानों को तोड़ा गया. इस दौरान ठेला, फूल विक्रेता, मछली विक्रेता सहित सड़क के किनारे सब्जी लगाने वाले दुकानदारों को हटाया गया. मशीन से सामग्रियों को हटाते हुए इसे ट्रैक्टर पर लादकर अन्यत्र ले जाया गया. अभियान के दौरान दुकानदारों ने इसका हल्का विरोध भी किया. दुकानदारों का कहना था कि अतिक्रमण हटाओ अभियान की कार्रवाई से पहले उनलोगों के रोजगार पर भी ध्यान देने की जरूरत है. दुकानदारों ने प्रशासन से स्थायी दुकान के लिए जगह देने की मांग की है.
क्या कहते हैं निगम के सहायक आयुक्त
मौके पर नगर निगम के सहायक आयुक्त अशोक हांसदा ने बताया कि वरीय अधिकारियों के निर्देश पर शहर में लगातार अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि फुटपाथ दुकानदारों और सड़क के किनारे अतिक्रमण करने वालों को पहले ही दुकान हटाने का निर्देश दिया गया था. लेकिन, जब दुकानों को नहीं हटाया गया तो यह कार्रवाई की गयी है. उन्होंने बताया कि शहरी क्षेत्र में लगातार अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया जायेगा, ताकि जाम की समस्या से लोगों को निजात मिल सके.
